
Surkuti Surdas agra
आगरा। भगवान श्रीकृष्ण के भक्त सूरदास एक संत होने के साथ—साथ महान कवि और संगीतकार भी थे। अपनी रचनाओं में उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया है। सूरदास के जीवन और मृत्यु को लेकर कोई पुख्ता तथ्य न होने के कारण लोगों के अलग—अलग मत रहे हैं। गोस्वामी हरिराय के 'भाव प्रकाश' के अनुसार सूरदास का जन्म दिल्ली के पास सीही नाम के गांव में एक अत्यन्त निर्धन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वहीं 'चौरासी वैष्णव की वार्ता' के आधार पर वे 1478 ईस्वी में आगरा-मथुरा रोड पर स्थित रुनकता नामक गांव में पैदा हुए थे। बाद में वे गऊघाट आकर रहने लगे। अब मतभेद कुछ भी हों, लेकिन आज हम आपको उसी स्थान पर लेकर आए हैं, जहां सूरदास जी ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से ओतप्रोत न जाने कितनी रचनाएं की थीं।
यहां ली थी दीक्षा
कहा जाता है कि 6 वर्ष की अवस्था में ही उन्होंने अपनी सगुन बताने की विद्या से माता-पिता को चकित कर दिया था, किन्तु इसी के बाद वे घर छोड़कर चार कोस दूर एक गांव में तालाब के किनारे रहने लगे थे। सगुन बताने की विद्या के कारण शीघ्र ही उनकी ख्याति हो गयी। गायन विद्या में भी वे प्रारम्भ से ही प्रवीण थे। शीघ्र ही उनके अनेक सेवक हो गये और वे 'स्वामी' के रूप में पूजे जाने लगे। 18 वर्ष की अवस्था में उन्हें पुन: विरक्ति हो गयी और वे यह स्थान छोड़कर आगरा और मथुरा के बीच यमुना के किनारे गऊघाट पर आकर रहने लगे। यहां पर ही वे संत श्री वल्लभाचार्य के संपर्क में आए और उनसे गुरु दीक्षा ली। वल्लभाचार्य ने ही उन्हें ‘भागवत लीला’ का गुणगान करने की सलाह दी। इसके बाद उन्हें श्रीकृष्ण का गुणगान शुरू कर दिया और जीवन में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
यहां पर है ये स्थान
रुनकता के पास जिस गऊघाट का उल्लेख है, वो आगरा से करीब 12 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे नंबर दो पर है। आगरा से रुनकता की ओर जाने वाले मार्ग पर सूर सरोवर पक्षी बिहार का बोर्ड दिखता है। यहां प्रवेश के लिए 30 रुपये का शुल्क है। मुख्यद्वार से प्रवेश के बाद करीब 2 किलोमीटर अंदर मुख्य मार्ग पर चलने के बाद दाहिनी ओर जाने वाले रास्ते पर अंत में यमुना किनारे सूरदास जी की तपोभूमि है। यहां पर वो कुंआ भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि एक बार सूरदास जी जब इस कुएं में गिर गए थे, तो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने हाथ से उन्हें खींचकर बाहर निकाला था। बाबूलाल ने बताया कि सूरकुटी विद्यालय भी यहां चलता है। काफी समय पहले भव्य मेले का आयोजन यहां पर होता था।
Updated on:
17 Sept 2019 02:10 pm
Published on:
17 Sept 2019 09:49 am
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