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Special: इस कुंड का पानी रात में हो जाता है दूधिया

इरादतनगर से सात किलोमीटर दूर बसे वृतला (वृथला) गांव का प्राचीन कुंड का पानी औषधि माना जाता है। आज भी इस कुंड का पानी रात के समय दूधिया रंग का हो जाता है।

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Bhanu Pratap Singh

May 08, 2016

Vritla kund

Vritla kund

आगरा। इरादतनगर से सात किलोमीटर दूर बसे वृतला (वृथला) गांव का प्राचीन कुंड का पानी औषधि माना जाता है। आज भी चर्म रोग से पीड़ित इस जल में स्नान करके अपने हर प्रकार के रोग को दूर भगाते हैं। इस कुंड के पीछे सतयुग की कहानी जुड़ी है। यहां भगवान गणेश और भगवान शिव का मंदिर भी है।

वृत्रासुर राक्षस के लिए सभी देवों ने किया था यहां यज्ञ
सतयुग में वृत्रासुर नाम का राक्षस हुआ था। यह राक्षस ब्राह्मण कुल से था। वृत्रासुर ने भगवान इन्द्र के सिंहासन पर कब्जा कर लिया था। कोई भी उसे परास्त नहीं कर पाया, जिसके बाद सभी देव विष्णु और भगवान महेश के पास पहुंचे। किसी ने कोई उपायर नहीं बताया। इसके बाद ब्रह्माजी ने देवताओं को बताया कि महर्षि दधीचि अपनी अस्थियां दे दें, तो उनकी अस्थियों से बने वज्र से वृत्रासुर का अंत हो सकता है। इसके बाद देवताओं ने महर्षि दधीचि से उनकी अस्थियां दान स्वरूप लीं और इन अस्थियों से बनाये गये वज्र से वृत्रासुर का अंत हुआ।

सुर के नाम पर पड़ा गांव का नाम वृतला
यहां के महंत महेश गिरी बताते हैं कि क्योंकि राक्षस वृत्रासुर ने ब्राह्मण कुल में जन्म लिया था, तो उसकी हत्या के बाद देवों ने सोचा कि उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगेगा। इस पाप को धोने के लिय सभी देवों ने पृथ्वी पर यज्ञ किया। यज्ञ के लिये जहां कुंड बनाया गया, आज उसे ही वृतला कुंड के नाम से जाना जाता है। इस गांव का नाम राक्षस वृत्रासुर के नाम पर ही वृतला (वृथला) पड़ा।

vritla kund
गुफा से लीला करने आते थे भगवान कृष्ण
वृतला स्थित गणेश मंदिर के महंत महेश गिरी बताते हैं, कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने यहां पर लीलाएं कीं थीं। उस समय इस कुंड में पानी नहीं हुआ करता था। सभी जीवों की प्यास बुझाने के लिये इस कुंड का लोकार्पण भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। इस कुंड से एक गुफा भी जाती थी, जो सीधे वृंदावन को जोड़ती थी। इस गुफा से भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन से यहां बाल लीलाएं करने आते थे। भगवान श्रीकृष्ण के स्पर्श से इस कुंड का पानी अमृत समान हो गया।

कुंड के पानी से बनती थी खीर
लोगों का कहना है कि इस कुंड के पानी से खीर बनती थी, जिसमें शक्कर डालने की भी जरूरत नहीं होती थी। आज भी इस कुंड का पानी रात के समय दूधिया रंग का हो जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु इस कुंड के पानी को भरकर अपने साथ ले जाते हैं।

vritla kund
चर्म रोग का होता है इलाज
इस कुंड के पानी की एक खास बात यह भी है कि दुनिया में जिसका चर्म रोग कहीं भी सही नहीं हो रहा हो, उसका चर्म रोग इस कुंड में नहाने मात्र से सही हो जाता है। आज भी यह मान्यता चली आ रही है। सैकड़ों लोग प्रतिदिन इस कुंड में स्नान करने के लिए आते हैं। गांव के ही सौरभ त्यागी ने बताया कि ऐसा नहीं है कि यह मान्यता ही है, यहां स्नान करने के बाद रोगी सही भी होते हैं।

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