
Ganesh Chaturthi
आमतौर पर हर माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली दोनों चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के नाम से ही जाना जाता है। लेकिन भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली गणेश चतुर्थी विशेष महत्व रखती है। कहा जाता है कि इस दिन ही भगवान गणपति का जन्म हुआ था। इसलिए गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चौदस तक गणेशोत्सव मनाया जाता है। देशभर में तमाम जगहों पर गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणपति घरों में पधारते हैं। इस दौरान दस दिनों तक उनकी पूजा व सेवा सत्कार किया जाता है। उनका पसंदीदा भोग लगाया जाता है। इसके बाद अनंत चौदस के दिन उनका विसर्जन कर दिया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 2 सितंबर को है। यदि आप भी अपने घर में गणेश जी की मूर्ति लाने वाले हैं तो इस तरह की मूर्ति लेकर आएं।
सुख समृद्धि के लिए सिंदूरी रंग की प्रतिमा लाएं
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र का कहना है कि यदि परिवार में सुख समृद्धि चाहिए तो गणपति की मूर्ति में उनके हाथों में उनका एक दंत, अंकुश और मोदक होना चाहिए। वहीं वे मूषक पर सवार होने चाहिए, साथ ही मूर्ति का रंग सिंदूरी होना चाहिए।
संतान सुख के लिए बाल गणेश लाएं
यदि संतान सुख की कामना है तो बाल गणेश को घर में विराजमान करें। इस मूर्ति के पूजन से घर में धन और आनंद की भी वृद्घि होती है।
सुख के स्थायित्व के लिए लेटे गणपति लाएं
आनंद उत्साह और उन्नति के लिए नृत्य मुद्रा वाली गणेश जी की प्रतिमा लाएं। वहीं लेटे हुए मुद्रा में गणपति की प्रतिमा लाने से घर में सुख और आनंद का स्थायित्व बना रहता है।
9 अंगुल से सवा फीट तक की मूर्ति लाएं
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि भक्ति सिर्फ मन से होती है, इसके लिए आडंबर की जरूरत नहीं होती। यदि आप गणपति लाना चाहते हैं तो 9 अंगुल से सवा फीट तक की मिट्टी की मूर्ति लेकर आएं। ताकि अनंत चौदस के दिन उस मूर्ति को घर में ही किसी बाल्टी या टब में विसर्जित किया जा सके। जब मूर्ति पूरी तरह विसर्जित हो जाए तो उसके पानी को किसी गमले या बगीचे में डाल दें। इससे जल प्रदूषण भी नहीं होगा और भगवान का पूजन भी विधिवत हो जाएगा। यदि आपके पास पर्याप्त धन है तो आप अष्टधातु, सोने, चांदी, पीतल, या तांबे की 9 अंगुल से सवा फीट तक की प्रतिमा लेकर आएं और दसवें दिन इसका विसर्जन कर अगले वर्ष के लिए सावधानी पूर्वक सहेज कर रख लें। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि यदिन हमारे किसी कार्य से प्रकृति, पर्यावरण व जीव जंतुओं को हानि पहुंचती है तो वो पूजा निष्फल हो जाती है। उसका पुण्य नहीं मिलता।
Published on:
31 Aug 2019 06:22 pm
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