आगरा। हम बचपन से सुनते आए हैं- चंदा मामा दूर के…। सवाल यह है हि चंदा (चन्द्रमा) को मामा ही क्यों कहते हैं। चाचा, फूफा या नाना क्यों नहीं? इसका जवाब दिया श्रीमनकामेश्वर मंदिर के मंहत योगेश पुरी ने। उनका कहना है कि चंदा को मामा क्यों कहते हैं, यह ज्ञान पुस्तकों से मिलता है। इसलिए 10 मार्च से आगरा कॉलेज खेल मैदान पर शुरू हुए आगरा पुस्तक मेला में भाग लें और अपना ज्ञान बढ़ाएं।
ये है कारण
श्री योगेश पुरी ने बताया कि आजकल के बच्चों को नहीं मालूम कि चंदा को मामा क्यों करते हैं, आप ताऊ, या कुछ और कहो। हमारे यहां तर्क ये है कि चन्द्रमा की उत्पत्ति सागर से हुई है। लक्ष्मी जी की उत्पत्ति भी सागर से हुई है। इसलिए दोनों का संबंध भाई-बहन हो गया। लक्ष्मी को हमारे यहां मां का दर्जा दिया गया है। हमारी मां का भाई कौन लगा, मामा लगा। इसी कारण चंदा को मामा कहा जाता है। चंदा मामा पत्रिका भी निकलती थी। पुस्तकों से इस तरह की जानकारी मिलती है। पुस्तक मेला का आयोजन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास नई दिल्ली द्वारा आयोजित है। इसमें देश के प्रसिद्ध साहित्यकार और प्रकाशकों की पुस्तकें छूट के साथ उपलब्ध होंगी। पुस्तक मेला में बाल साहित्य पर खासा जोर है।
