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Nag Panchami 2018: जानिए क्यों मनाते हैं नाग पंचमी और क्यों पिलाते हैं सर्पों को दूध

जानिए नाग पंचमी का महत्व, कारण, पूजा का शुभ मुहुर्त व पूजा विधि।

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आगरा

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suchita mishra

Aug 03, 2018

Nag Panchami 2018

Nag Panchami 2018

श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नागों के पूजन का विधि विधान है। इस वर्ष नाग पंचमी 15 अगस्त को है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र के अनुसार पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय सुबह 11 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर शाम 04 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। जो लोग काल सर्प योग की पूजा इस दिन करना चाहते हैं वे इस दिन जो लोग नाग पूजा आैर काल सर्प योग की साधना आदि करते हैं वे 11 बजकर 48 मिनट से लेकर डेढ़ बजे के बीच पूजा करें तो श्रेष्ठ रहेगा। नाग पंचमी का त्योहार वर्षों से मनाया जा रहा है, लेकिन आज भी काफी लोगों को नहीं पता है कि इसे क्यों मनाया जाता है। आइए जानते हैं।

ये है मान्यता
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र बताते हैं कि नागपंचमी के त्योहार के पीछे एक मान्यता प्रचलित है। दरअसल पांडवों के वंशज और कलियुग के प्रथम राजा परीक्षित की मृत्‍यु तक्षक सांप के काटने से हुई थी। पिता की मृत्यु के बाद परीक्षित के पुत्र जन्‍मेजय ने ये संकल्‍प लिया कि वह धरती से सभी सर्पों का विनाश कर देंगे। इसके लिए उन्होंने यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ के दौरान दुनियाभर के सभी सांप अपने आप खिंचकर यज्ञकुंड में गिरने लगे। इसी बीच तक्षक नाग अपनी जान बचाने के लिए इंद्र देव के सिंहासन में जाकर छिप गए। लेकिन यज्ञ इतना प्रभावशाली था कि तक्षक नाग की खातिर इंद्र का सिंहासन भी खिंचकर हवनकुंड के पास पहुंचने लगा।

इससे देवताओं में खलबली मच गई। ऋषियों और देवताओं ने राजा जन्मजेय से अनुरोध किया कि यदि वे दुनियाभर के सर्पों का खात्मा कर देंगे तो प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा। उसके बाद राजा जन्‍मेजय ने देवताओं का अनुरोध स्वीकार किया और यज्ञ की अग्नि को शांत कर तक्षक नाग को क्षमा कर दिया। उस दिन सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी थी। जले हुए नागों को ठीक करने के लिए आस्तिक मुनि ने उन्हें गाय के दूध से स्नान कराया था, जिससे उनके शरीर की जलन समाप्त हुई थी। तब से इस दिन नाग देवता की पूजा में उन्हें दूध से स्नान कराने, दूध पिलाने व दूध से बनी वस्तुओं का भोग लगाने का चलन है।

ऐसे करें पंचमी के दिन पूजन
घर के मुख्यद्वार के दोनों ओर नाग का चिंत्र बनाएं या प्रतिमा स्थापित करें। फिर धूप, दीप, कच्चा दूध, खीर आदि से नाग देवता की पूजा करें। गेंहू, भूने हुए चने और जौं का प्रसाद नागों को चढ़ाएं तथा प्रसाद के रूप में बांटें।