
डॉ. अरुण राठौर
आगरा। हमने अकसर सुना है कि पुलिस पिटाई से व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि शरीर पर चोट के निशान भी नहीं होते हैं। इसका कारण बताया है एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के सर्जरी विभाग में एसोसिसिएट प्रोफेसर डॉ. अरुण राठौर ने। उन्होंने बताया कि चोट से पेट में रक्तस्राव होने से मौत हो जाती है। एक डंडे से भी व्यक्ति की मौत हो सकती है।
तीन स्थानों पर चोट से होती है मौत
डॉ. राठौर ने ‘पत्रिका’ को बताया कि पुलिस की पिटाई से स्पलीन (तिल्ली) या लिवर (जिगर या यकृत) में चोट लग जाए तो रक्तस्राव हो जाता है। मरीज रक्तस्राव के कारण मर जाता है। आंत फटने से भी मौत हो जाती है। कभी भी पेट या सिर में नहीं मारना चाहिए। पीछे, पैर, हाथ में मार सकते हैं, क्योंकि इससे जान का खतरा नहीं है। जान का खतरा तब है, जब पेट में चोट लगे। पेट में रक्तस्राव दिखता नहीं है। इससे यह पता भी नहीं चल पाता है कि चिकित्सक के पास जाना है या नहीं। पुलिस को लगता है कि अपराधी पिटाई से बचने का बहाना कर रहा है।
एक डंडे से भी जा सकती जान
डॉ. राठौर ने बताया कि जरूरी नहीं है कि बहुत अधिक पिटाई से कोई मरे। एक डंडे से भी जान जा सकती है अगर यह डंडा गलत जगह लग जाए। ये गलत जगह है लिवर (सीने के दाईं ओर ठीक नीचे) और स्पलीन (सीने के ठीक नीचे बाईं ओर)। मौत का तीसरा कारण है आंत फटना। इन तीन कारणों से किसी की भी चौबीस घंटे के अंदर जान जा सकती है। सिर में नहीं मारना चाहिए। पेट और सिर को बचाकर रखें, बाकी जगह मारने से जान को खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि अकसर सुनते हैं कि पुलिस की हिरासत में कोई कैदी मर जाता है तो इसका कारण लिवर और स्पलीन में रक्तस्राव हो जाता है, क्योंकि बीमारी के बारे में पता नहीं चल पाता है। अंदर ही अंदर ब्लीडिंग के कारण पेंशेंट की मौत हो जाती है।
Published on:
30 Dec 2017 09:48 am
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