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महिलाओं में हर्निया की समस्या का ये हैं बड़ा कारण

सोसायटी ऑफ एंडोस्कोपिक एंड लैप्रोस्कोपिक सर्जन ऑफ आगरा द्वारा हर्निया पर आयोजित की गई वर्कशॉप

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आगरा

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Abhishek Saxena

Oct 29, 2017

agra

workshop on hernia

आगरा। समय की कमी और प्रसव पीड़ा से बचने के लिए सिजेरियन कराने का निर्णय महिलाओं के लिए भविष्य में समस्या बन सकता है। किसी भी तरह के पेट के ऑपरेशन के बाद हर्निया की समस्या 15 फीसदी बढ़ जाती है। आवश्यकता न होने पर भी सिजेरियन कराना महिलाओं में हर्निया होने की सम्भावना बढ़ा रही है। महिलाओं में ऐसे मामलों का ग्राफ बढ़ रहा है।

वर्कशाप में दी गई जानकारी
सोसायटी ऑफ एंडोस्कोपिक एंड लैप्रोस्कोपिक सर्जन ऑफ आगरा की हर्निया विषय पर आयोजित वर्कशॉप में सोसायटी के संरक्षक एसडी मौर्या ने यह जानकारी दी। वहीं एम्स (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंस) के पूर्व निदेशक व एमजीएम विवि जयपुर के वाइस चांसलर प्रो. एमसी मिश्रा ने बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 7 लाख ऑपरेशन हर्निया के होते हैं। भारत में हर्निया के मात्र 4 फीसदी ऑपरेशन ही लैप्रोस्कोपिक विधि से हो रहे हैं। जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत व जापान में 60 प्रतिशत है। लैप्रोस्कोपित विधि से हर्निया का आपरेशन करने पर दोबारा हर्निया होने की सम्भावना मात्र 5 फीसदी रह जाती है। जबकि ओपन सर्जनी में यह प्रतिशत 40-60 है। एम्स में एसोसिएट डॉ. असुरी कृष्णा ने laparoscopic inguinal anatomy, झांसी मेडिकल कॉलेज एमएलबी के सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव सिन्हा ने मैशेज एंड फिक्सेशन, डॉ. एसडी मौर्या ने हर्नियोप्लास्टी व डॉ. अमित श्रीवास्तव ने टिप एंड ट्रिक्स ऑफ लैप विषय पर व्याख्यान दिया। वर्कशॉप के दौरान सचखंड अस्पताल में 12 मरीजों के निशुल्क ऑपरेशन किए गए। इस अवसर पर मुख्य रूप से सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. अपूर्व चतुर्वेदी, डॉ. रवि पचौरी, डॉ. एचएल राजपूत, डॉ. जीजी सिंघल, डॉ. भूपेन्द्र, डॉ. संदीप गुप्ता आदि मौजूद थे

खर्च आम मरीज नहीं कर पाते वहन
सोसायटी के उपाध्यक्ष डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि भारत में लैप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन का प्रतिशत हर्निया में डॉक्टरों का प्रशिक्षित होने का ग्राफ कम होने के साथ खर्चे का अधिक होना भी है। जो आम मरीज वहन नहीं कर पाता। लैप्रोस्कोपिक विधि में जाली का खर्चा कुछ अधिक होने के साथ उसको पेंच से कसने के लिए लगभग 30 हजार की गन का खर्चा भी होता है। इस खर्चे को कम करने के लिए भारत में जाली के गन से पेंच लगाने के बजाय धागे से टांके लगाए जा रहे हैं। जिसका खर्चा में 500-600 रुपए तक हो जाता है। लेकिन लैप्रोस्कोपिक विधि में टांके लगाने की सही ट्रैनिंग होना बी जरूरी है।

ऐसे पहचाने हर्निया की समस्या
सोसायटी के उपाध्यक्ष हर्निया यानि पेट की दीवार का कमजोर हो जाने से आंत और झिल्ली का बाहर निकल आना। यदि खांसने या चलने पर पेट का कोई हिस्सा फूल जाता है या दर्द होता होता है तुरन्त सर्जन से सम्पर्क करें। लेटने पर पेट का वह हिस्सा सामान्य हो जाता है। समस्या को नजरअंदाज करने पर आंत बाहर निकलने पर सड़ जाती हैं और सेप्टिक हो सकता है। ऐसे में समस्या ज्यादा बढ़ जाती है।

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