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World Breastfeeding Week: हर मां के लिए जरूरी है नवजात को ब्रेस्टफीडिंग कराना वर्ना हो सकती है ये समस्या

World Breastfeeding Week (1-7 August) ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे को तो लाभ होता ही है, लेकिन मां के लिए ब्रेस्टफीडिंग कराना भी उतना ही जरूरी है।

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आगरा

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suchita mishra

Aug 01, 2018

World Breastfeeding Week

World Breastfeeding Week

आजकल की आधुनिक जीवनशैली में महिलाएं फिगर को लेकर काफी जागरूक हो गई हैं। खासकर शादी के बाद पहले जैसी दिखने की तमन्ना को पूरा करने के लिए क्या क्या नहीं करतीं। सबसे ज्यादा समस्या तब आती है जब महिलाएं मां बनती हैं। इस दौरान उन्हें इस बात का डर सताता रहता है कि कहीं बच्चे को फीड कराने से उनका फिगर बिगड़ न जाए। इस कारण वे ज्यादातर बच्चे को बॉटल से फीड कराती हैं। इससे बच्चे को मां के दूध से मिलने वाले मिनरल्स पूरी तरह नहीं मिल पाते और बच्चे की ग्रोथ पर इसका असर पड़ता है। महिलाओं की इस शंका के निवारण के लिए हमने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि गोयल बात की। पेश हैं अंश।

फीडिंग से कोई फर्क नहीं पड़ता
डॉ. रश्मि गोयल का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान तीन बार महिलाओं के ब्रेस्ट का आकार बढ़ता है जो कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। लेकिन फीडिंग कराने से फिगर बिगड़ने वाली बात गलत है। यदि ब्रेस्ट साइज में किसी तरह का फर्क पड़ता भी है तो बाद में एक्सरसाइज करके पहले जैसा फिगर किया जा सकता है।

ब्रेस्टफीडिंग नहीं कराएंगी मां तो हो सकती है परेशानी
डॉ. रश्मि गोयल बताती हैं कि बच्चे की बेहतर ग्रोथ के लिए मां का दूध सर्वोत्तम आहार होता है। लिहाजा हर मां को कम से कम छह माह तक नवजात को फीड जरूर कराना चाहिए। वहीं ब्रेस्टफीडिंग से सिर्फ बच्चे को ही लाभ नहीं होता, बल्कि मां के लिए ये हर हाल में जरूरी है। यदि मां बच्चे को फीड नहीं कराएंगी तो दूध पस में बदल सकता है जो उनके लिए काफी कष्टकारी हो सकता है।

लेटकर न पिलाएं दूध
लेटकर दूध पिलाने से बचना चाहिए क्योंकि खाने की नली और सांस की नली एक ही जगह होती हैं। लेटकर फीड कराने से कई बार दूध बच्चे की सांस नली में जाने का खतरा होता है। ऐसे में उसे निमोनिया, साइनोसिस जैसी परेशानी हो सकती है। बच्चे की जान भी जा सकती है।

बुखार में ब्रेस्टफीडिंग नहीं कराने की धारणा गलत
कुछ मांएं खुद को बुखार आने पर बच्चे को फीड नहीं कराती हैं कि कहीं उसको भी बुखार न हो जाए। लेकिन ये धारणा गलत है। सभी मांए बुखार के समय भी बच्चे को आराम से फीड करा सकती हैं नहीं तो उनका बुखार और बढ़ेगा। बुखार की सटीक वजह जानें और उसका इलाज कराएं।

मिक्स फीडिंग कराना कितना सही
वैसे तो छह महीने तक सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए, लेकिन यदि सिर्फ मां के दूध से बच्चे का पेट नहीं भरता है तो मिक्स फीडिंग करा सकते हैं।