Ahmedabad. गुजरात में शुक्रवार से राज्य की उचित मूल्य की दुकान वाले 17 हजार लाइसेंस धारक दुकानदार हड़ताल पर उतर गए हैं। इन दुकानदारों ने गोदाम से किसी भी प्रकार का अनाज, तेल एवं चीनी का स्टॉक नहीं लेने और राशनकार्ड धारकों को वितरित नहीं करने का निर्णय किया है। शुक्रवार को उचित मूल्य के दुकानदार हड़ताल पर रहे। उन्होंने कई जगहों पर इकट्ठे होकर प्रदर्शन किया।
गुजरात राज्य फेयर प्राइज शॉप एंड केरोसीन लाइसेंस होल्डर एसोसिएशन के प्रमुख प्रह्लाद मोदी ने कहा कि एक साल पहले दुकानदारों ने आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। तब लंबित मांगों को राज्य सरकार के समय रखा था। तत्कालीन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री नरेश पटेल और विभाग के अधिकारियों के समक्ष मांगों पर चर्चा हुई। उसमें सहमति बनी थी कि गुजरात के राशन दुकानदारों को कम से कम 20 हजार रुपए प्रति महीने कमीशन मिलना चाहिए। सरकार ने इस संबंध में परिपत्र भी किया। लेकिन एक साल बाद भी उसका अमल नहीं हो रहा है। जब भी मांग करते हैं तो अधिकारी फिर से फाइल देखने की बात करते हैं। लेकिन कुछ करते नहीं है। इसके चलते दुकानदारों को शुक्रवार से हड़ताल पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
उचित मूल्य की दुकान का लाइसेंस रखने वाले एक व्यापारी ने कहा कि काफी समय से सरकार के समक्ष दुकानदारों की कई मांगे लंबित हैं। इसमें प्रमुख मांग प्रति महीने उचित मूल्य के दुकानदार को 20 हजार कमीशन दिया जाए। गोदाम से दुकान पर पहुंचने वाले अनाज , चीनी की बोरी में होने वाली घट को बंद किया जाए। 2010 से बारकोडेड राशनकार्ड और ऑनलाइन सर्वर के माध्यम से राशन का वितरण हो रहा है लेकिन आए दिन सर्वर बंद हो जाता है। इससे दुकानदार और राशनकार्ड धारक परेशान होते हैं, इसलिए इसमें सुधार लाया जाए। कोरोना के समय में कई उचित मूल्य दुकान धारकों की मौत हुई है, उन्हें 25 लाख रुपए की सहायता देने का सरकार का निर्णय किया गया था , लेकिन कई मामलों में अब तक भी सहायता नहीं दी गई है। ऐसे किस्सों में उन्हें तत्काल सहायता जारी की जाए। कई दुकानदार के फिंगरप्रिंट नहीं आते हैं। ऐसे में उसे बिल बनाकर राशन देने की मंजूरी दी जाए। इन मांगों पर सरकार आश्वासन ही देती है, लेकिन कोई निर्णय नहीं करती है। इससे वे हड़ताल करने को मजबूर हैं।