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गुजरात राज्य में शराबबंदी है, लेकिन यहां स्वास्थ्य कारणों के आधार पर शराब के सेवन की छूट भी दी जाती है। इसके लिए सिविल अस्पताल की ओर से चिकित्सकीय जांच करके मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जिसके आधार पर लिकर परमिट दिया जाता है।अहमदाबाद के सिविल अस्पताल की बात करें तो एक जनवरी 2023 से लेकर 30 अप्रेल 2025 तक (लगभग सवा दो वर्ष) में 1759 नए लोगों के लिकर परमिट बनाने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट प्रदान किए गए हैं।
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल प्रशासन के अनुसार इन सवा दो वर्षों में सबसे अधिक वर्ष 2023 में 1248 नए लोगों को लिकर परमिट के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। वर्ष 2024 में महज 290 नए परमिट परमिल के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र दिए गए। इसके अलावा जारी वर्ष 2025 के शुरुआती चार माह में 221 परमिट के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र दिए गए हैं। नए परमिट के अलावा निर्धारित समय पर पुराने परमिट को रिन्यू भी किया जाता है। वर्ष 2023 में 3176 परमिट रिन्यू करने को मेडिकल प्रमाण पत्र दिए गए। वर्ष 2024 में 3209 परमिट रिन्यू किए तो जारी वर्ष 2025 के चार माह में 870 परमिट रिन्यू करने को मेडिकल प्रमाण पत्र दिए गए हैं।इस तरह से सवा दो वर्ष में नए और रिन्यू किए गए नौ हजार से अधिक लिकर परमिट के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र जारी किए गए।
नए लिकर परमिट व रिन्यू की एवज में शुल्क लिया जाता हैजिसे संबंधित अस्पताल की रोगी कल्याण समिति में जमा करवाया जाता है। लिकर परमिट का आवेदन करने वाले हरेक व्यक्ति का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता है। मेडिकल जरूरत को ध्यान में रखकर ही अस्पताल के चिकित्सकों की ओर से इस परमिट को जारी करने के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र दिया जाता है।
गुजरात विधानसभा में दी गई जानकारी में बताया गया कि राज्य में दो वर्ष में 21 हजार से अधिक शराब सेवन व रखने के परमिट दिए गए। यह एक तरह से हेल्थ परमिट के रूप में होता है, जिसमें आवेदक को शराब सेवन की आवश्यक स्थिति को ध्यान में रखकर दिया जाता है। दो वर्ष में जिन लोगों को परमिट दिए गए थे उनसे 28.67 करोड़ रुपए की आय हुई। जिसे संबंधित अस्पतालों की रोगी कल्याण समिति में जमा करवाया गया। जिन लोगों के परमिट बने हैं उनमें से सबसे अधिक 67 फीसदी अहमदाबाद और सूरत के हैं।
Updated on:
04 May 2025 10:23 pm
Published on:
04 May 2025 10:22 pm
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