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1971 Indo-Pak war Special: जब Madhapar की महिलाओं ने सिर्फ 72 घंटों में कर दी थी Bhuj Air strip की मरम्मत

1971 Indo-Pak war, 16 december, Vijay Divas, Madhapar, Bhuj, Kutch, Gujarat

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1971 Indo-Pak war Special:  जब Madhapar की महिलाओं ने सिर्फ 72 घंटों में कर दी थी Bhuj Air strip की मरम्मत

1971 Indo-Pak war Special: जब Madhapar की महिलाओं ने सिर्फ 72 घंटों में कर दी थी Bhuj Air strip की मरम्मत

अहमदाबाद. आज सोमवार को जब पूरा देश भारत- पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध के उपलक्ष्य में बांग्लादेश के निर्माण पर विजय दिवस मना रहा होगा तब ऐसे में इस युद्ध के दौरान एक ऐसा वाकया गुजरात के सीमावर्ती कच्छ जिले से भी जुड़ा है जो सैनिकों की नहीं बल्कि एक गांव के महिलाओं के पराक्रम और वीरता की कहानी है जिसमे कच्छ जिले में भुज के पास माधापार गांव की महिलाओं ने सिर्फ 72 घंटों में ही भारतीय वायु सेना की भुज हवाई पट्टी की मरम्मत कर दी।
वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान दुश्मन देश की ओर से एक ही रात 18 बम गिराए गए थे। इस कारण भारतीय वायु सेना की भुज हवाई पट्टी पूरी तरह नष्ट हो गई थी। तब इस हवाई पट्टी को जल्द से जल्द मरम्मत कराना जरूरी था। इसके लिए भुज के पास माधापर गांव की करीब 800 महिलाओं व युवतियों ने लगातार काम करते हुए भुज एयरपोर्ट की हवाई पट्टी के मरम्मत का काम किया था। ज्यादातर महिलाएं पूरे दिन मरम्मत में लगी रहती थीं और शाम होते घर चली जाती थीं। विमान के आने पर आस-पास के गड्ढे या बंकर में छिप जाती थीं।
ये महिलाएं हरे रंग की साड़ी पहनकर काम करती थी जिससे दुश्मनों को झाडिय़ों जैसा प्रतीत हो और वे बॉम्बिंग से बच सकें। तब ये महिलाएं खुद को सैनिक की तरह अनुभव करती थी और खुद की चिंता भी नही की।
बिना थके हुए लगातार 72 घंटों से ज्यादा समय तक काम करने वाली इन महिलाओं ने ये सुनिश्चित किया था कि यहां से फिर से भारतीय एयरक्राफ्ट आसमान में उड़ान भर सकें। चौथे दिन जब शाम 4 बजे एयरक्राफ्ट ने इस हवाई पट्टी से उड़ान भरी, तब इन महिलाओं को काफी गर्व का अनुभव हो रहा था।
बताया जाता है कि उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने युद्ध के 3 वर्ष बाद इन महिलाओं को उपहार देने चाहा लेकिन इन महिलाओं ने ये उपहार लेने से मना कर दिया। इन महिलाओं ने तब कहा कि ये उनकी देश के प्रति ड्यूटी थी।
पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने इन महिलाओं के सम्मान में वीरांगना स्मारक का लोकार्पण किया था और इन महिलाओं को सम्मानित भी किया था।