
60 villages will become smart village
हिम्मतनगर।केन्द्रीय सरकार ने स्मार्ट सिटी बनाने का अभियान शुरू किया है। इस परिकल्पना की राह पर अहमदाबाद के ट्रेड एडवाइजर जगत शाह ने देश के ६० गांवों को स्मार्ट विलेज में परिवर्तन करने का प्रयास शुरू किया है, जिनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वतन वडनगर सहित गुजरात के १५ गांव भी शामिल हैं।
जगत शाह ने हाल ही मेंटोर ऑन रोड प्रोजेक्ट के तहत अमरीका के ३४ शहरों का दौरा किया और १५०० से अधिक प्रवासी भारतियों (एनआरआई) से मिले। जगतभाई ने सभी के सामने अपना गांव दत्तक लेने का प्रस्ताव रखा। प्रथम चरण में ६१ एनआरआई ने निर्णय किया है कि वह अपने वतन के गांव को दत्तक लेकर सस्टेनेबल स्मार्ट विलेज बनाएंगे। इसके लिए विशेष पर्पज व्हीकल (एसवीपी) बनाकर पद्धतिसर सर्वे किया जाएगा और गांव की आवश्यकता के अनुसार तकनीक के उपयोग से स्वच्छ, प्लास्टिक मुक्त व बायोगैस उपयोग करने वाले स्मार्ट विलेज बनाए जाएंगे।
मेंटोर ऑन रोड के स्थापक जगत शाह के अनुसार एक हजार दिनों में इन सभी गांवों को स्मार्ट विलेज बनाया जाएगा। वैश्विक परिणामों पर आधारित स्मार्ट गांव के ७० परिणान एवं भारत की वास्तविकता के लिए उपयोग किए गए गांव की शोध रिपोर्ट पेश की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर जिस एनआरआई ने अपने गांव को दत्तक लिया है, वह उस गांव का दौरा करेगा और गांव की समस्या एवं आवश्यकता को समझेंगे। स्थानीय लोगों से मिलकर उनकी जरुरत एवं समस्यों के आधार पर प्राथमिक सर्वेक्षण करेंगे।
उनका यह भी प्रयास होगा कि गांव में बिजनेस मॉडल भी तैयार हो, जिससे गांव के लोगों को रोजगार मिल सकें। इस प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गांवों को आधुनिक बनाने में जो खर्चा होगा, वह राज्य सरकार, केन्द्र सरकार, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पोंसिबिलिटी फंड, ओवरसीज डवलपमेंट एजेंसी फंड एवं अन्य स्त्रोतों से वित्त एकत्रित किया जाएगा। अपने गांव को दत्तक लेने वाले एनआरआई तो सिर्फ कुछ समय, तकनीक आधारित अपने निर्देश, नेटवर्क व अनुभवों का लाभ देंगे।
उल्लेखनीय है कि अमरीका निवासी एनआरआई की ओर से देश के ६१ गांवों को दत्तक लिया गया है, जिनमें गुजरात के सबसे अधिक १५ गांव शामिल हैं। इन १५ गांवों में वडनगर, बोरीज, धर्मज, गोधावी, ओरणा, गारियाधार आदि गांव शामिल हैं।
इस तरह बनेंगे स्मार्ट विलेज
प्रत्येक गांव में पवनचक्की, हर गांव को धुआं मुक्त बनाने के लिए रसोई गैस, सौलर ड्रायर, प्लास्टिक वेस्ट से टॉयलेट बनेंगेष प्रत्येक घर में बरसाती पानी के संग्रह के लिए सिस्टम, बिजली उत्पादन के लिए बायोगैस एवं वेस्ट का उपयोग, श्रेष्ठ शिक्षक व स्वास्थ्य सेवा एवं भूगर्भ गटर व्यवस्था व पक्के रास्ता बनाए जाएंगे।
Published on:
25 Dec 2017 09:11 pm
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