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गुजरात के कुल मैंग्रोव वन क्षेत्र का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा कच्छ जिले में

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष मिष्टी योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज विश्व पर्यावरण दिवस पर कच्छ के चार स्थानों पर मैंग्रोव लगाने का करेंगे शुभारंभ

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गुजरात के कुल मैंग्रोव वन क्षेत्र का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा कच्छ जिले में

गुजरात के कुल मैंग्रोव वन क्षेत्र का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा कच्छ जिले में

भुज. गुजरात के कुल मैंग्रोव वन क्षेत्र का 68 प्रतिशत हिस्सा कच्छ जिले में है। पर्यावरण की रक्षा में यह एक मजबूत पहरेदार की भूमिका निभाते हैं। यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए फायदेमंद हैं, साथ ही प्राकृतिक आपदाओं को रोकने में भी सहायक हैं।

2023-24 के केंद्रीय बजट के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव के पौधरोपण के लिए मिष्टी (मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंजिबल इनकम) योजना की घोषणा की। कच्छ जिले में 4 स्थान सहित देश में 75 स्थानों पर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से इस योजना का शुभारंभ करेंगे।गुजरात राज्य में 25 विभिन्न स्थानों पर मैंग्रोव के पौधे लगाए जाएंगे। इनमें चार कच्छ जिले की लखपत तहसील के कोटेश्वर, रोडसर-लक्की, अबड़ासा तहसील के जखौ और मुंद्रा तहसील के जरपारा हैं। गुजरात में मैंग्रोव का वन क्षेत्र 1175 वर्ग किमी क्षेत्र में हैं। जिसमें से 798.74 वर्ग किमी क्षेत्र कच्छ जिले में स्थित है।

कच्छ में तीन प्रकार के मैंग्रोव

मैंग्रोव के पेड़ ज्यादातर तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं। इस प्रकार के पेड़ों में खारे पानी में बढ़ने की विशेष क्षमता के साथ प्राकृतिक अनुकूलन होता है। एविसिनिया मरी प्रजाति के पेड़ कच्छ के तटीय और खाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में वन विभाग की ओर से इन क्षेत्रों में मैंग्रोव की दो प्रजातियां - राइजोफोरा म्यूक्रोनटा और सिरिओप्स टल लगाई गई हैं।

पर्यावरण और जीवसृष्टि की रक्षा में अहम भूमिका

मैंग्रोव के पेड़ तटीय जन समुदायों के लिए वरदान हैं। यह पेड़ समुद्र तट के कटाव को रोकते हैं। इसके अलावा चक्रवात और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ ढाल के रूप में कार्य करते हैं। स्थानीय लोगों के लिए ईंधन के स्रोत के रूप में और पशु चारे के पूरक के रूप में मैंग्रोव के पेड़ विशेष रूप से उपयोगी हैं। मैंग्रोव क्षेत्र स्तनधारियों जैसे लोमड़ियों, जंगली सूअरों के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों के लिए रहने की जगह के रूप में उपयोगी हैं। प्राकृतिक रूप से उगने वाले शैवाल, कीड़े, छोटी मछलियां आदि के लिए यह महत्वपूर्ण भोजन हैं। मछुआरों के लिए मैंग्रोव क्षेत्र एक वरदान है क्योंकि समृद्ध मैंग्रोव क्षेत्रों में मछलियां भी बहुतायत में पाई जाती हैं।