
भावनगर जिले में पालीताणा स्थित शैत्रुंजय पर्वत। (फाइल फोटो)
- मेहुल सोनी
पालीताणा. भावनगर जिले के पालीताणा जैन तीर्थ क्षेत्र में 800 मंदिर बंद होने के कारण ढाई महीनों से बाजार में कोरोना महामारी की मंदी का असर पड़ रहा है। पालीताणा में शेत्रुंजय पर्वत पर 3700 से अधिक सीढिय़ां चढ़ कर स्थित 800 मंदिरों तक पहुंचाने के लिए डोली-पालकी वाले 2000 पंजीकृत लोग मंदिर खुलने की आस लगाकर बैठे हैं।
पिछली 19 मार्च से लॉक डाउन - 1 की घोषणा होने के साथ ही दर्शनार्थियों के लिए मंदिर बंद कर दिए गए। करीब ढाई महीने से अधिक बीतने के बाद सोमवार से अनलॉक - 1 की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन मंदिर खोलने की मंजूरी नहीं देनेके कारण आवक बंद होने के बावजूद बिजली के बिल, स्कूल फीस, मकान किराया, सहित विविध खर्च यथावत होने से मध्यम वर्ग के लोगों की आर्थिक हालत खराब हो रही है।
पालीताणा जैन तीर्थ क्षेत्र शेत्रुंजय पर्वत पर करीब 800 मंदिर हैं, यह सभी मंदिर ढाई महीनों से अधिक समय से बंद हैं। इनका असर पालकी वालों, गुलकंद, भरतकाम-कशीदाकारी से जुड़े करीब 5 हजार कारीगरों, सैकड़ों धर्मशालाओं, होटलों, रेस्टोरेंटों टेंट एंड डेकोरेशन, केटरिंग सर्विस, रिक्शा चालन से जुड़े लोगों और पालीताणा नगर के स्थानीय बाजारों पर पड़ रहा है। पालीताणा के इन व्यवसायों से जुड़े अनेक कामदारों को हटा दिया गया है, इस कारण इनको बेरोजगारी की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
इनके साथ ही पालीताणा में हीरों के कारखानों से जुड़े करीब 25 हजार श्रमिक भी बेरोजगारी के संकट का सामना करने को मजबूर हैंं। काम से हटाए गए कामदारों और श्रमिकों में से कुछ ने तो खेतों में काम करना शुरू कर दिया है। इनके अलावा बड़ी संख्या में श्रमिक गांवों में मनरेगा के कार्यों से जुड़कर रोजगार का जुगाड़ करने में सफल हुए हैं।
छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक पैकेज घोषित हो
लॉक डाउन के कारण पालीताणा के व्यापारियों के धंधे बंद हो गए। गरीब व मध्यम वर्ग के सामान्य नागरिकों की हालत अत्यंत खराब हो गई है। मार्च से जून महीने तक सभी के बिजली बिल माफ करने चाहिए, छोटे व्यापारियों के लिए सरकार की ओर से आर्थिक पैकेज घोषित किया जाना चाहिए, नगर पालिका की ओर से सभी प्रकार के कर माफ करने चाहिए।
- प्रवीणभाई गढवी, अध्यक्ष, पालीताणा नागरिक शराफी सहकारी मंंडली।
अधिकांश व्यवसाय यात्रियों पर निर्भर
पालीताणा के अधिकांश व्यवसाय यात्रियों पर निर्भर है। मंदिर बंद होने के कारण यात्री नहीं आ रहे। भरतकाम-कशीदाकारी, केटरिंग, डोली-पालकी वालों, श्रमिकों, छोटे दुकानदारों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। इसलिए इनके लिए सरकार की ओर से राहत पैकेज देने की जरूरत है।
- भरतभाई राठोड, अध्यक्ष, लॉरी गल्ला एसोसिएशन, पालीताणा।
Published on:
03 Jun 2020 11:38 pm
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