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Poland: जामनगर के पूर्व महाराजा के नाम पर रखा पोलैण्ड में ट्राम का नाम

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Poland: जामनगर के पूर्व महाराजा के नाम पर रखा पोलैण्ड में ट्राम का नाम

Poland: जामनगर के पूर्व महाराजा के नाम पर रखा पोलैण्ड में ट्राम का नाम

A tram in Poland named after former Maharaja of Jamnagar

पोलैण्ड में ट्राम का नाम जामनगर के पूर्व महाराजा जाम साहब दिग्विजय सिंह जाडेजा के नाम पर रखा गया। पोलैण्ड स्थित भारतीय दूतावास ने आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के सिलसिले में आजादी का अमृत महोत्सव की शुरुआत की गई। इस अवसर पर भारतीय राजदूत नगमा मलिक ने व्रोकलाव के महापौर जेसेक सुत्रिक के साथ इंडिया एट 75 ट्राम-डोबरी महाराजा के नाम से ट्राम का उद्घाटन किया। पोलैण्ड में जामनगर के इस पूर्व महाराजा को डोबरी महाराज के नाम से जाना जाता है। पोलैण्ड की भाषा में डोबरी का मतलब अच्छा होता है। दूसरे विश्व युद्ध के समय जामनगर और कोल्हापुर के तत्कालीन महाराजा ने पोलैण्ड के 6000 से ज्यादा लोगों को आसरा दिया था। तब दिग्विजय सिंह ने युद्ध के चलते अनाथ हुए 1000 बच्चों व महिलाओं को तब की रियासत के बालाचडी पैलेस में आश्रय दिया था। पोलैण्ड की राजधानी वॉरसॉ में उनके नाम पर एक स्कूल भी है।

जामनगर से है खास रिश्ता

कहानी कुछ ऐसी है कि 1939 में जर्मनी और रूस की सेना ने पोलैण्ड पर कब्जा कर लिया। इस युद्ध में अपने देश को बचाने के लिए पोलैण्ड के हजारों सैनिक मारे गए और उनके बच्चे अनाथ हो गए। 1941 के ये बच्चे पोलैण्ड के शिविरों में रहे। लेकिन इसके बाद रूस ने बच्चों को वहां से भगाना शुरू कर दिया। तब 600 से ज्यादा बच्चे अकेले या अपनी मां के साथ नाव पर सवार होकर जान बचाने के लिए निकले थे, लेकिन दर्जनों देशों ने उन्हें शरण देने से इन्कार कर दिया। जब उनकी नाव मुंबई पहुंची तो जामनगर के महाराजा ने दरियादिली दिखाते हुए उन्हें शरण दी। तब भारत गुलाम था और अंग्रेजों ने भी बच्चों को आश्रय देने से इन्कार कर दिया था।
1989 में वहां के लोगों ने आभार जताने के लिए जामनगर के पूर्व महाराजा के नाम पर एक चौक का नाम रखा। आज भी पोलैण्ड से लोग हर साल बालाचडी आते हैं और उस धरती को प्रणाम करते हैं जिसने दूसरे विश्वयुद्ध में उनकी जान बचाई थी।