
पाटण. जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण का 52वां दीक्षा दिवस महोत्सव का आयोजन वैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्दशी रविवार को पाटण जिले के सिद्धपुर में आयोजन किया गया।
श्री स्वामी नारायण गुरुकुल परिसर में बने संयमोत्सव समवसरण में आचार्य ने कहा कि तात्विक दृष्टि से देखा जाए तो संसारी जीवों में कम से कम छह आत्माएं होती ही हैं। यह संसार दुःख प्रचुरता लिए हुए है। जन्म-मृत्यु, रोग, कष्ट आदि सब दुःख है। प्रश्न हो सकता है कि वह कौन-सा कार्य है, जिसे करने से दुर्गति से बचा जा सकता है। इसका शास्त्र में उत्तर प्रदान किया गया कि साधुपन को स्वीकार कर साधना करने से दुर्गति से बचा जा सकता है। संन्यास अथवा साधुपन का प्राप्त होना भी बहुत बड़े सौभाग्य की बात है।
आचार्य ने कहा कि 1974 में वैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को मेरी दीक्षा मुनि सुमेरमल स्वामी के हाथों राजस्थान के सरदारशहर में हुई। करीब 12 वर्ष की अवस्था में मुझे संयम रत्न की प्राप्ति हुई। इसको 51 वर्ष संपन्न हुए।
आचार्य ने कहा कि आज चतुर्दशी है। आज का दिन साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा से जुड़ गया है। तीन वर्ष पूर्व आज के दिन साध्वी विश्रुतविभा को साध्वीप्रमुखा के रूप में प्रतिष्ठित होने का अवसर आया था। इतने बड़े साध्वी समुदाय का मुखिया बनना भाग्य की बात होती है।
आचार्य ने अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की ओर से आज के दिन युवा दिवस मनाए जाने के संदर्भ में आशीष प्रदान किया। परिषद के अध्यक्ष रमेश डागा, उपाध्यक्ष पवन माण्डोत, परिषद के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि योगेशकुमार, चातुर्मास व्यवस्था समिति-अहमदाबाद के स्वागताध्यक्ष भैरुलाल चौपड़ा, तेरापंथी सभा-अहमदाबाद के अध्यक्ष अर्जुनलाल बाफना ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
गुजरात के श्रम व रोजगार मंत्री बलवंतसिंह राजपूत ने आचार्य से आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि जैन संप्रदाय ने गुजरात की आध्यात्मिक और सामाजिक समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राजपूत ने सभी से स्वैच्छिक रक्तदान करने की अपील की। बड़ी संख्या उपस्थित लोगों ने इसका समर्थन किया।
Published on:
11 May 2025 09:17 pm

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