
अहमदाबाद. एसीपी रीमा मुंशी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मुंशी को फिर से ड्यूटी पर लिए जाने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को बहाल रखा है।
उच्च न्यायालय के आदेश को नेहा परमार नामक उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष ुचुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह अवलोकन किया कि याचिकाकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक मापदंडों के कई मुद्दे उठाए जिसका पुुलिस उपाधीक्षक की भर्ती प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि भर्ती प्रक्रिया के समय मुंशी शारीरिक परीक्षण में उत्तीर्ण नहीं हुई थी, लेकिन बावजूद इसके मुंशी की एसीपी के रूप में नियुक्ति दी गई। उधर मुंशी की ओर से दलील दी गई कि उनकी भर्ती सभी नियमों के तहत हुई है। इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं की गई है।
इससे पहले उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने गत वर्ष दिसम्बर महीने में एसीपी मुंशी को फिर से पद संभालने को कहा था। इससे पहले गत वर्ष अप्रेल महीने में एकल न्यायाधीश ने मुंशी को ड्यूटी से हटाने का आदेश दिया था। इस आदेश को मुंशी ने खंडपीठ में चुनौती दी थी। खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश को खारिज करते हुए मुंशी को फिर से पदस्थापित करने को कहा था। इससे पहले सिंगल जज ने उम्मीदवार नेहा परमार परमार की ओर से दायर याचिका पर राज्य सरकार से एसीपी रीमा मुंशी को पद से हटाने को कहा था। मुंशी ने सिंगल जज के इस फैसले को खंडपीठ में चुनौती दी थी। इसके बाद खंडपीठ ने इस संबंध में अपील याचिका पर अंतिम सुनवाई नहीं होने तक गत मई महीने में मुंशी को अवकाश पर जाने को कहा था।
नेहा परमार नामक एक उम्मीदवार ने मुंशी के चयन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस याचिका में कहा गया था कि मुंशी शारीरिक योग्यता पर खरी नहीं उतरी हैं।
Published on:
05 Feb 2018 10:54 pm
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