
Ahmedabad. शहर स्थित गुजरात साइंस सिटी अब सिर्फ रोबोटिक्स, अंतरिक्ष से जु़ड़ी जानकारी का ही केन्द्र नहीं बल्कि यह मछली और जलीय जीवों के संरक्षण, संवर्धन का भी केन्द्र बनकर उभर रहा है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि साइंस सिटी का माहौल अफ्रीकी पेंगुइन को भी रास आ रहा है। यही वजह है कि उसके एक, दो नहीं बल्कि तीन बच्चे यहां जन्मे हैं। यह काफी महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि एक ओर अफ्रीकी पेंगुइन की घटती आबादी चिंता का विषय है। ऐसे में साइंस सिटी में इसका कुनबा बढ़ाने में मदद मिली है। सांइस सिटी में जन्मे इन पेंगुइन के बच्चों का विश्व पेंगुइन दिवस 25 अप्रेल (शुक्रवार) पर नामकरण किया गया। इन्हें डेजी, कियारा और बालू नाम दिया गया है। जन्मदिन भी मनाया।
गुजरात की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रधान सचिव मोना खंधार ने कहा कि पेंगुइन के तीन बच्चों का साइंस सिटी में जन्म होना गुजरात के लिए गर्व की बात है। यह पर्यावरण जागरूकता और प्राणी कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का परिणाम है।
खंधार ने कहा कि इन तीनों नन्हे पेंगुइन का नामकरण भी किया है। डेजी, कियारा और बालू नाम दिया है। तीनों को साइंस सिटी में आने वाले पर्यटक भी देख सकेंगे। इन्हें पेंगुइन गैलरी में रखा गया है।
साइंस सिटी में अफ्रीकी पेंगुइन को वहां जैसा माहौल दिया गया, जो उसे रास आ रहा है। उसने जून 2024 में पहला अंडा रखा। उसके संवर्धन को एक्वेटिक गैलरी की टीम ने मेहनत की। 38 दिनों की देखरेख के बाद जुलाई में अंडे से नर बच्चा निकला। उसके बाद पेंगुइन की जोड़ी ने अक्टूबर में दो अंडे रखे। जिसमें से नवंबर में दो मादा पेंगुइन बाहर निकलीं। इनके खानपान, माहौल पर विशेष ध्यान दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने लुप्त होने वाली प्रजाति की सूची में अफ्रीकी पेंगुइन को रखा है। ये नामीबिया व दक्षिण अफ्रीका के समुद्री किनारों पर मिलते हैं। जलवायु परिवर्तन के चलते इनकी संख्या में 97 फीसदी की गिरावट हुई है। अभी 19800 से कम पेंगुइन बच्चे हैं। ऐसे में साइंस सिटी में इनका कुनबा बढ़ना बड़ी उपलब्धि है।
Published on:
25 Apr 2025 11:12 pm
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