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145 साल बाद आगामी वर्ष नए रथों पर सवार हो नगरभ्रमण करेंगे ‘जगन्नाथ’

Ahmedabad city news, Ahmedabad Rathyatra,build new rath, 146th rathyatra, -नए बनाए जाएंगे तीनों ही रथ, मौजूदा रथ बढ़ाएंगे म्यूजियम की शोभा-जगन्नाथपुरी, राजस्थान समेत विविध जगहों से बुलाए जाएंगे कारीगर-इस साल इन्हीं रथों से निकलेगी 145वीं रथयात्रा

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145 साल बाद आगामी वर्ष नए रथों पर सवार हो नगरभ्रमण करेंगे ‘जगन्नाथ’

145 साल बाद आगामी वर्ष नए रथों पर सवार हो नगरभ्रमण करेंगे ‘जगन्नाथ’

ओमप्रकाश शर्मा/नगेन्द्र सिंह

अहमदाबाद. देश में पुरी के बाद दूसरी सबसे बड़ी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा अहमदाबाद में निकलती है। आगामी वर्ष 2023 में जब अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम के साथ नगरभ्रमण पर निकलेंगे तो नए रथों पर सवार होकर निकलेंगे। 2023 में निकलनी प्रस्तावित 146वीं जगन्नाथ रथयात्रा के लिए तीनों ही नए रथ बनाने का निर्णय किया गया है। क्योंकि मौजूदा रथों का निर्माण 144 वर्ष पहले हुआ है। पुराने रथ हो जाने के कारण नए रथों का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए मजबूत लकड़ी भी मंगा ली गई है। हालांकि इस साल 2022 में निकलने वाली 145वीं रथयात्रा मौजूदा रथों पर ही निकलेगी।
शहर में हर वर्ष अषाढ़ी दूज को निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में रथों पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ नगरजनों को दर्शन देने के लिए निकलते हैं। 18 किलोमीटर लंबी इस रथयात्रा में लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।
अहमदाबाद की ऐतिहासिक रथयात्रा के लिए उपयोग किए जाने वाले रथ काफी पुराने हो गए हैं। जिससे मंदिर प्रशासन ने नए रथों का निर्णय किया है। जबकि पुराने तीनों ही रथों को म्यूजियम में रखा जाएगा।
जगन्नाथ मंदिर के ट्रस्टी महेन्द्र झा ने बताया कि इससे पहले रथों का निर्माण 144 वर्ष पहले किया गया था। यानि पहली बार जब 1878 में अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की पहली रथयात्रा निकली थी तब इन रथों का निर्माण किया गया था। जिसके चलते रथ काफी पुराने हो गए हैं। जिससे नए रथ बनाने का निर्णय किया है। हालांकि नए रथ 2023 में निकलने वाली 146वीं रथयात्रा के लिए बनाए जाएंगे। इस साल तो इन्हीं रथों से रथयात्रा निकलेगी। उन्होंने कहा कि वैसे तो हर साल रथों की मरम्मत रथयात्रा से पूर्व की जाती है। लेकिन नए रथों का 1878 के बाद पहली बार निर्माण हो रहा है। उनका कहना है कि अगले वर्ष जब भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे तो वे नए रथों में सवार होंगे।

नए रथों में आसानी हो सकेंगे दर्शन
जगन्नाथ मंदिर सूत्रों के अनुसार नए रथों के निर्माण में कुछ बदलाव भी किया जाएगा। इन रथों को इस तरह का आकार दिया जाएगा कि श्रद्धालु आसानी से भगवान के दर्शन कर सकें। नए रथों में सिंहासन को कुछ ऊंचा करने की योजना है। हालांकि उनकी चौड़़ाई ज्यादा नहीं की जाएगी, क्योंकि रास्ते संकड़े हैं। भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम नंदीघोष है, जबकि बलराम के रथ का नाम तालध्वज और बहन सुभद्रा के रथ का नाम दर्पदलन है।

पुरी, राजस्थान के कारीगर करेंगे रथों का निर्माण
भगवान जगन्नाथ की वर्ष 2023 में निकलने वाली 146वीं यात्रा में तीनों ही रथ नए होंगे। आगामी दिनों में इन रथों के निर्माण की शुरुआत होगी। इसके लिए जगन्नाथ पुरी, राजस्थान और गुजरात के कारीगरों को बुलाया जाएगा। ये सभी मिलकर रथों का निर्माण करेंगे। पुराने रथ होने के कारण नए रथ बनाने का निर्णय किया गया है। रथों के निर्माण के लिए सागवान की मजबूत लकड़ी को वलसाड जिले के पास वघई से मंगवाया गया है।
-दिलीप दास महाराज, महंत, जगन्नाथ मंदिर, अहमदाबाद