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आईआईएम-ए बदलने जा रहा है ‘लोगो’, 45 प्राध्यापकों ने जताया विरोध

Ahmedabad, IIMA, new logo, faculty opposed, एक की जगह दो लोगो बनाए, इंटरनेशनल लोगो से संस्कृत सूत्र वाक्य को हटाया, -निदेशक और बोर्ड ऑफ गर्वनर्स को लिखा पत्र, -फैकल्टी काउंसिल अंधेरे में, बिना चर्चा के ही निर्णय पर आपत्ति

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आईआईएम-ए बदलने जा रहा है ‘लोगो’, 45 प्राध्यापकों ने जताया विरोध

आईआईएम-ए बदलने जा रहा है ‘लोगो’, 45 प्राध्यापकों ने जताया विरोध

अहमदाबाद. विश्व के श्रेष्ठ प्रबंध संस्थानों में शुमार भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद (आईआईएम-ए) अब अपना लोगो बदलने जा रहा है। एक की जगह अब संस्थान दो लोगो अपनाने जा रहा है। जिसमें एक घरेलू (डॉमेस्टिक) जबकि दूसरा इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय)। इंटरनेशनल लोगों में से मौजूदा लोगो में शामिल संस्कृत सूत्र वाक्य को हटाया जा रहा है।
आईआईएम-ए के 45 प्राध्यापकों ने 8 मार्च को संस्थान के बोर्ड ऑफ गर्वनर्स के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिरला व निदेशक को पत्र लिखकर इसका विरोध किया है। पत्र का अब तक जवाब नहीं मिला है। पत्र में अन्य मुद्दों पर भी चिंता दर्शाते हुए चर्चा करने का उल्लेख है।
आईआईएम-ए सूत्रों का कहना है कि चार मार्च 2022 को हुई संस्थान की फैकल्टी काउंसिल (अकामिदक काउंसिल) की बैठक में सदस्यों को जानकारी दी गई कि संस्थान के बोर्ड ऑफ गर्वनर्स (बीओजी) ने संस्थान का लोगो बदलने का निर्णय किया है। दो नए लोगो को मंजूरी दी है। जो रजिस्टर भी हो गए हैं।
संस्थान के एक प्राध्यापक ने बताया कि संस्थान की फैकल्टी काउंसिल को अंधेरे में रखकर और चर्चा किए बिना ही संस्थान ने लोगो बदलने का निर्णय किया है। उन्हें बताया गया है कि डॉमेस्टिक और इंटरनेशनल दो नए लोगो मंजूर किए हैं। उन्हें रजिस्टर भी कर लिया गया है। इंटरनेशनल लोगो में से मौजूदा लोगो के संस्कृत सूत्र वाक्य ‘विद्याविनियोगाद्विकास:’ को हटाने का निर्णय किया है। क्योंकि विदेश के लोग उसे समझेंगे नहीं। मौजूदा लोगो 1961 में आईआईएम-ए संस्थान की स्थापना के समय से लागू है। नए लोगो बनाने की प्रक्रिया में प्राध्यापकों को शामिल नहीं किया गया। इतना ही नहीं उन्हें बताया तक नहीं गया है। यह आईआईएम-ए की फैकल्टी गवर्नेंस संस्कृति के खिलाफ है।

‘जाली’ और ‘संस्कृत सूत्र वाक्य’ हमारी पहचान
प्राध्यापकों ने कहा कि लोगो में मौजूद सीदी सैयद की जाली और संस्कृत सूत्र वाक्य हमारी पहचान हैं। यह भारतीय लोकाचार को दर्शाते हैं। यह भारतीयता की पहचान हैं। हमारी विद्या और संस्थान से जुड़ाव को दर्शाता है। हमारे देश के लिए विकास, उद्यम, समाज, विद्यार्थी और प्रबंधन संकाय की विकास के लिए हमारी प्रतिबद्धता दर्शाता है। इसमें बदलाव हमारी पहचान पर प्रहार के समान है।

आईआईएमए की पहचान पर पड़ेगा असर
प्राध्यापकों ने अपने पत्र में कहा कि लोगों में बदलाव और नए लोगों के चलते संस्थान की पहचान पर विपरीत असर पडऩे की आशंका जताई है। नए लोगो आईआईआई-ए की हैरिटेज, कोर पर्पज, कोर वैल्यू को नहीं दर्शाते हैं।

आईआईएम-ए के पूर्व निदेशक ने भी जताई नाराजगी
आईआईएम-ए के पूर्व निदेशक प्रो.बकुल धोलकिया ने भी आईआईएम-ए के लोगो को बदलने की बात पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे गलत निर्णय बताया। इस लोग के जरिए ही संस्थान ने वैश्विक पहचान बनाई है। फैकल्टी काउंसिल से चर्चा नहीं की गई। यह गलत है। इसे वापस लेना चाहिए।