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Gujarat hindi News : भावनगर की विशिष्ठ पहचान बना है तख्तेश्वर महादेव मंदिर

सफेद संगमरमर के पत्थर से सम्पूर्ण रूप से बना यह मंदिर ऊंचे प्लींथ पर बनाया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को इस मंदिर से पूरे भावनगर शहर का मनोरम दृश्य देखने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

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Gujarat hindi News : भावनगर की विशिष्ठ पहचान बना है तख्तेश्वर महादेव मंदिर

Gujarat hindi News : भावनगर की विशिष्ठ पहचान बना है तख्तेश्वर महादेव मंदिर

राजकोट. करीब 120 वर्ष प्राचीन भावनगर शहर के मध्य छोटे से टेकरी पर स्थित शिवलिंग और उसके चारों ओर सोने की थाल वाले इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। सफेद संगमरमर के पत्थर से सम्पूर्ण रूप से बना यह मंदिर ऊंचे प्लींथ पर बनाया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को इस मंदिर से पूरे भावनगर शहर का मनोरम दृश्य देखने का सौभाग्य प्राप्त होता है। अपनी कई खासियत की वजह से तख्तेश्वर महादेव मंदिर को भावनगर की विशिष्ठ पहचान बताया जाता है।

राजा तख्तसिंह ने कराई मंदिर की स्थापना

जानकारी के अनुसार वर्ष 1883 के दौरान शहर के बीच स्थित टेकरी पर सफेद संगमरमर पत्थर से इस मंदिर को बनया गया है। मंदिर के इस टेकरी परे से पूरे भावनगर का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है। मंदिर की स्थापना श्री तख्तसिंह राजा ने कराया था। मंदिर में महादेव की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इसे आम जनता के दर्शन के लिए खोल दिया गया था।

संत के आदेश पर बनाया मंदिर
बताया जाता है कि एक बार महाराजा तख्तसिंह यात्रा करने निकले थे। यात्रा से वापस आते समय बोटाद गांव के पास एक संत मिला। राजा ने ठंड से कांपते उस संत को देखकर उन्हें शॉल ओढ़ा दिया। इस दौरान संत ने फूंक मारकर उस शॉल को भस्म कर दिया। संत का नाम मस्तरामबापू बताया गया। घटना को देखकर राजा समझ गए कि यह सामान्य साधु-संत नहीं, बल्कि कोई चमत्कारी महापुरुष हैं। संत के निकट आकर राजा ने पूछा कि उनके लायक कोई काम हो तो आदेश करें। संत ने राजा से कहा, एक मंदिर, एक अस्पताल, एक धर्मशाला, एक स्कूल, एक कॉलेज का निर्माण करें ताकि आपकी स्मृति हमेशा बनी रहे। आपके विनाश के बाद, आपका कार्य आपको हमेशा जीवित रखेगा। इसके बाद राजा ने मंदिर बनवाने का निर्णय किया। तख्तेश्वर महादेव मंदिर को शहर के हेरिटेज प्रॉपर्टी में शामिल किया गया है। मंदिर के विषय में एक मान्यता यह भी है कि एक रात राजा को स्वप्न आया कि वह नर्मदा किनारे जाकर वहां से शिवलिंग लाकर स्थापित करें। इसके बाद राजा तख्तसिंह ने संत के आदेश से मंदिर की स्थापना की। सम्पूर्ण संगमरमर से बना मंदिर कलात्मक का नमूनारूप है।