
कोरोना संक्रमण के बाद उपचार में विलंब है खतरनाक : डॉ. गुलेरिया
अहमदाबाद. दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद उपचार में विलंब सबसे अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। मौत की यह सबसे बड़ी वजह है। अहमदाबाद में कोरोना की स्थिति को लेकर समीक्षा के लिए आई एम्स की टीम के साथ शनिवार को गुजरात के अधिकारी और चिकित्सकों के साथ सिविल अस्पताल में आयोजित बैठक के बाद उन्होंने यह कहा। उन्होंने गुजरात में कोविड को लेकर किए गए इन्तजामों को लेकर संतोष भी व्यक्त किया।
एम्स के निदेशक डॉ. गुलेरिया ने कहा कि गुजरात सरकार की ओर से अहमदाबाद शहर में १२०० बेड अस्पताल में कोविड उपचार के लिए समर्पित किया है और उसमें जो संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं वे बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से डरने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। कोरोना के लक्षण होने पर अस्पताल का संपर्क कर टेस्ट के लिए आगे आने की भी लोगों से सलहा दी। कोरोना का संक्रमण लगने के बाद उपचार में विलंब करना मौत का बड़ा कारण है। एम्स की टीम का मानना है कि फेफड़े और हृदय तक वायरस के पहुंचने से खून के गाढ़ा होना भी मौत का कारण है। यह तभी ज्यादा होता है जब उपचार में विलंब होता है।
उनके साथ एम्स की टीम के डॉ. मनीष सुनेजा भी मौजूद रहे। टीम का मानना है कि जागरुकता से मौत की दर को कम किया जा सकता है। खासकर बुजुर्गों और पहले से ही बीमार लोगों के लिए विलंब से उपचार खतरनाक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई न सिर्फ सरकार या चिकित्सकों पर ही नहीं छोडऩी चाहिए। सब को साथ मिलकर कोरोना को हराने की जरूरत है।
शहर में कोरोना की स्थिति को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान स्वास्थ्य सचिव डॉ. जयंती रवि, अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक एवं हाल में कोविड के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) डॉ. एम.एम. प्रभाकर, इन्चार्ज चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जयप्रकाश मोदी व अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।
Published on:
09 May 2020 09:16 pm
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