
वडोदरा. जिले की करजण तहसील स्थित कल्ला शरीफ में पीर फ़ैयाज़ुद्दीन तथा पीर फ़ैज़ुर्रसूल उर्फ़ हाजी पीर बापजी का कौमी एकता के प्रतीक के रूप में 82वां उर्स मेला एवं दस्तारबंदी का जलसा आयोजित किया गया।
इस अवसर पर प्रातःकाल तरही मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें प्रसिद्ध शायरों और नातख़्वानों ने भाग लिया। मुशायरे में उपस्थित शायर उस्मानगनी सैदा क़ुरैशी ने उनका जमाल रखिए हमेशा ख़याल में, जिनकी हयात-ए-जावेदां है बाल-बाल में…, आंखों की पुतलियों में है रोशन अभी तलक, जल्वा-नुमा है गुम्बद-ए-ख़िज़रा ख़याल में कलाम पेश किया।
प्रयागराज के डॉ. ज़फ़रुल्ला ज़फ़र ने “माना बड़ी शान है हर एक नबी की, लेकिन कोई मिस्ल-ए-सह-ए-अबरार नहीं है” कलाम पेश किया। अन्य शायरों ने भी अपने अशआर के माध्यम से वहदत, संयम, भाईचारे और कौमी भलाई का संदेश दिया। इस अवसर पर सैयद कलीम अतहर बावा एवं डॉ. सैयद मोईन बावा भी उपस्थित रहे।
ज़ोहर की नमाज़ के पश्चात हज़रत के पुराने निवास स्थान से संदल मुबारक का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस आस्ताने पर पहुंचने के बाद मुस्ताक अली बावा तथा अन्य पीर-मशायख के हाथों परचम-कुशाई के साथ संपन्न हुआ। इसके बाद आस्ताने पर संदल मुबारक की रस्म अदा की गई तथा ग़िलाफ़ मुबारक और चादर मुबारक चढ़ाई गई।
इस अवसर पर मुस्ताक अली बावा और वाहिद अली बावा ने देश में शांति, कौमी सौहार्द, एकता, अखंडता तथा देश के सर्वांगीण विकास के लिए दुआएं कीं। इशा की नमाज़ के बाद सूफ़ी-ए-मिल्लत अरबी अकादमी के तत्वावधान में दस्तारबंदी का जलसा आयोजित किया गया। इसमें छह हुफ़्फ़ाज़ को उपस्थित उलेमाओं के हाथों दस्तार पहनाई गई और उन्हें सनद प्रदान की गई।
इस अवसर पर अजमेर के खादिम सैयद अनवर हुसैन, सैयद आतिफ़ हुसैन चिश्ती सहित अनेक पीर-मसायख और उलेमा मौजूद रहे। उर्स के प्रतीक मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने हाजी पीर बापजी के आस्ताने पर अकीदत पेश की। राजस्थान, रत्नागिरि, उत्तर प्रदेश, नासिक समेत गुजरात के अकीदतमंद उमड़े।
Published on:
18 Feb 2026 10:56 pm
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