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Vadodara वडोदरा में चाय बेचने वाले की बेटी इक्षिता का कमाल : पाई 87.77 पर्सेन्टाइल रैंक

Vadodara 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का परिणाम  

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Vadodara वडोदरा में चाय बेचने वाले की बेटी इक्षिता का कमाल : पाई 87.77 पर्सेन्टाइल रैंक

इक्षिता।

Vadodara वडोदरा. शहर की इक्षिता राणा ने 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में 87.77 पर्सेंटाइल प्राप्त करने के बाद इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर बनने की इच्छा जताई है। शहर के गोलवाड़ क्षेत्र स्थित स्लम क्वार्टर निवासी व चाय की लॉरी चलाने वाले भावेश एवं सिलाई करने वाली निराली की पुत्री इक्षिता भूतड़ीझापा के एक स्कूल की छात्रा है। इक्षिता के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर बनने की इच्छा के कारण रोजाना 7 घंटे पढ़ाई की। ट्यूशन करना मुश्किल था। माता-पिता ट्यूशन कराने के लिए तैयार थे। वह ट्यूशन नहीं करना चाहती थी। स्वयं पर पूरा भरोसा था कि अच्छे प्रतिशत लाएगी और उसे 10वीं कक्षा में इच्छित परिणाम मिला। इक्षिता के पिता भावेश के अनुसार बेटी की मेहनत से तय था कि वह प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होगी। उसकी मेहनत रंग लाई है। जब तक मेरी बेटी पढऩा चाहेगी, पत्नी के साथ वे भी कड़ी मेहनत करते रहेंगे और अपनी पुत्री के उच्च अध्ययन के सपने को साकार करेंगे। खुशी जताते हुए मां निराली ने कहा कि हर तरह से पुत्री का देंगी। पति के साथ उन्होंने भी काफी संघर्ष किया है। पुत्री को ऐसा संघर्ष नहीं करने देंगे। उसे उच्च शिक्षा देकर जीवन में आगे बढ़ाएंगे।

Vadodara कश्मीर से कन्याकुमारी तक भी जाने की चाहत : स्वच्छता का संदेश देने वाली समिधा की 92.77 पर्सेन्टाइल रैंक

वडोदरा. शहर के एक विद्यालय की छात्रा समिधा पटेेल ने स्वच्छता का संदेश देने के लिए पोरबंदर से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक 547 किमी साइकिल चलाकर भी 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में 92.77 पर्सेंटाइल किए। समिधा के अनुसार साइकिल से कश्मीर से कन्याकुमारी जाना चाहती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए वह कटिबद्ध हैं। साइकिल चलाने के साथ-साथ उच्च शिक्षा पर ध्यान देने की इच्छा जताते हुए उन्होंने कहा कि साइकिलिंग के जरिए देश का गौरव बढ़ाने का प्रयास करेंगी।
साइकिलिंग का शौक बचपन से रहा है और देश को स्वर्ण पदक दिलाने तक वह इस शौक के जरिए साइकिल चलाना जारी रखेंगी। 12 साल की उम्र में मनाली से लेह-लद्दाख तक 517 किमी की यात्रा में व्यसन मुक्ति का संदेश दे चुकी हैं। समिधा के पिता कल्पेश के अनुसार पुत्री बचपन से ही पढ़ाई में होशियार रही है, बचपन से ही साइकिल चलाने का शौक रहा है। वह साइकिल चलाने के शौक के साथ उच्च अध्ययन में उसे समान रुचि है।