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Asiatic Lions: सदियों से गिर में साथ रह रहे हैं आदमी व शेर, पशुपालक मालधारी समुदाय और अफ्रीकी जनजाति के साथ है शेरों का खास रिश्ता

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Asiatic Lions: सदियों से गिर में साथ रह रहे हैं आदमी व शेर, पशुपालक मालधारी समुदाय और अफ्रीकी जनजाति के साथ है शेरों का खास रिश्ता

Asiatic Lions: सदियों से गिर में साथ रह रहे हैं आदमी व शेर, पशुपालक मालधारी समुदाय और अफ्रीकी जनजाति के साथ है शेरों का खास रिश्ता

अहमदाबाद. यूं तो जंगल में शेर और आदमी एक दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आते हैं, लेकिन बात अगर गिर के जंगलों की करें तो वहां इन दोनों के बीच सदियों से दोस्ती का रिश्ता है। गिर में मालधारी (पशुपालक) समुदाय और अफ्रीका से लाई गई जनजाति सिद्दी के करीब 1000 परिवार रहते हैं, लेकिन शेर उन्हें या उनके पशुओं पर आम तौर पर हमला नहीं करते हैं।
कभी शेर भूले भटके उनके पास तक आ भी जाएं तब भी वे लकड़ी फटकार के या अपनी आवाज से ही शेरों को दूर भगा देते हैं। शिकारियों की सूचना भी वन विभाग को यही लोग देते हैं और शेरों को बचाते हैं। वहीं शेर भी अन्जान लोगों पर तो गुरार्ते हैं लेकिन इन पर नहीं। इनमें से बहुत से लोग शेरों को नाम से पहचानते हैं, जैसे मोहन, सुल्तान, राधा, किंग, बादशाह आदि। वन्य जीव विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि आदमी और शेर गिर में सदियों से साथ रह रहे हैं तो उनके बीच प्राकृतिक रूप से एक दोस्ताना स्थापित हो गया है।

नवाब लाए थे अफ्रीकी जनजाति

अफ्रीकी मूल के सिद्दी लोगों को जूनागढ़ के नवाब गिर शेरों के संरक्षण के लिए विशेष रूप से अफ्रीका से लेकर आए थे और मालधारी लोग सौराष्ट्र क्षेत्र के ही मूल निवासी हैं। मालधारी व सिद्दी लोग प्रकृति व प्राकृतिक संसाधनों को लेकर काफी संवेदनशील होते हैं। वे शाकाहारी ही हैं। वन्यजीवों से बहुत प्रेम करते हैं।