
सरसपुर स्थित भगवान रणछोड़राय मंदिर में भगवान की प्रतिमा।
Ahmedabad अगले महीने 16 जुलाई को शहर में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथयात्रा का काउंटडाउन शुरू हो गया है। 29 जून को जलयात्रा के साथ ही भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम शहर के अपने ननिहाल सरसपुर पहुंचेंगे। इसके साथ ही अगले 15 दिनों के लिए पूरा सरसपुर भक्ति, श्रद्धा और उत्सव के रंग में रंग जाएगा।ओडिशा के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी रथयात्रा को लेकर पूरे शहर में धार्मिक उल्लास है, लेकिन सबसे अधिक उत्साह सरसपुर में दिखाई देने लगा है।
परंपरा के अनुसार जलयात्रा के दिन भगवान को बहन और भाई के साथ जमालपुर स्थित निज मंदिर से सरसपुर स्थित रणछोड़राय मंदिर ले जाया जाता है। जहां उनकी भांजों की तरह अगवानी और सेवा की जाती है। इन दिनों सरसपुर में विशेष मंडप भी तैयार कर दिया गया है। रणछोड़राय मंदिर के निकट बने इस मंडप में अभी से चहल-पहल बढ़ गई है।
भगवान के ननिहाल प्रवास के दौरान प्रतिदिन सुबह और शाम भजन-कीर्तन, आरती, गीत-संगीत और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। भगवान कृष्ण को प्रिय माने जाने वाले माखन, मिश्री और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का भोग भी प्रतिदिन अर्पित किया जाएगा। मंदिर परिसर और आसपास की गलियां भक्ति के सुरों से गूंजती रहेंगी।
मान्यता है कि सरसपुर आने वाला हर श्रद्धालु भगवान का भांजा है। इसलिए यहां आने वाले लोगों की आवभगत अपने परिजनों की तरह की जाती है। रथयात्रा के दिन तो सरसपुर की पहचान ही बदल जाती है। यहां करीब दो लाख श्रद्धालु जुटते हैं और सभी के लिए ननिहाल की ओर से प्रसाद स्वरूप भोजन की व्यवस्था की जाती है। गलियों और शेरियों में सेवा, स्नेह और श्रद्धा का ऐसा संगम दिखाई देता है, जो अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा की सबसे अनूठी परंपराओं में से एक माना जाता है।
Published on:
24 Jun 2026 10:33 pm
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