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कार्गो शिप कंटेनर निर्माण में भावनगर बनाएगा देश को आत्मनिर्भर

विदेशों में होगी बिक्री: देश में प्रतिवर्ष तीन लाख से अधिक कंटेनर की जरूरत

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कार्गो शिप कंटेनर निर्माण में भावनगर बनाएगा देश को आत्मनिर्भर

भावनगर में कंटेनर इकाई के निरीक्षण के दौरान चर्चा करते केन्द्रीय बंदरगाह, जहाजरानी व जलमार्ग राज्यमंत्री मनसुख मांडविया। (फाइल फोटो)

राजेश भटनागर

भावनगर. विदेशों से खरीदे जाने वाले शिप कंटेनर का निर्माण अब आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत गुजरात के भावनगर में किया जाएगा।

विविध औद्योगिक इकाइयों के विकास की दौड़ में अग्रसर हो रहे भावनगर को शिप कंटेनर के निर्माण का हब बनाने की योजना बनाई गई है। इसे लेकर केन्द्रीय बंदरगाह, जहाजरानी व जलमार्ग राज्यमंत्री मनसुख मांडविया ने पिछले दिनों पुराने बंदरगाह क्षेत्र में एक कंटेनर निर्माण ईकाई का दौरा किया।

केन्द्र सरकार की योजना के तहत कार्गो शिप में सामान परिवहन के लिए आवश्यक शिप कंटेनर के हब के रूप में भावनगर को विकसित किया जाना है।

इसके लिए केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से सभी प्रकार की मदद ली जाएगी। इसके साथ ही आगामी समय में समुद्री व्यापार में वृद्धि के साथ-साथ कंटेनर का भावनगर में उत्पादन बढऩे पर विदेश में भी बेेचे जाएंगे।

वर्तमान समय में भारत में प्रति वर्ष तीन लाख कंटेनर की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अनेक औद्योगिक इकाइयां भावनगर में कार्यरत होंगी।

अलंग शिपब्रेकिंग यार्ड की क्षमता दोगुनी करने की योजना
विश्व के सबसे बड़े जहाजबाड़े भावनगर जिले के अलंग शिपब्रेकिंग यार्ड को अधिक सुदृढ़ बनाने और कार्यक्षमता दोगुनी करने की भी योजना है।

इसके लिए भावनगर अलंग शिपब्रेकिंग यार्ड एसोसिएशन की ओर से एक सेमिनार आयोजित की गई जिसमें शिपब्रेकरों की समस्याओं का समाधान किया गया।

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में अलंग के विकास के लिए नीति की घोषणा कर चुकी हैं।

इसके तहत अलंग शिपब्रेकिंग यार्ड की कार्यक्षमता 32 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर अगले पांच वर्ष में 64 लाख मीट्रिक टन करने के लिए प्रयास शुरू किए जाएंगे।

अलंग शिपयार्ड के प्रतिस्पर्धी पाकिस्तान, बांगलादेश व चीन को टक्कर देने के लिए मूलभूत और ढांचागत सुविधाएं बढ़ाने के साथ इस उद्योग को शहर या राज्य तक सीमित नहीं रखने के बारे में ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है।