
योनि मार्ग नहीं फिर भी बन जाती हैं महिलाएं माता
अहमदाबाद. शहर के सिविल अस्पताल परिसर के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिसिज एंड रिसर्च सेंटर (आईकेडीआरसी) में कार्यरत गाइनेक विभाग में उपचार के बाद ऐसी महिलाएं भी मां बन रहीं हैं जिनके जन्म से ही योनिर्माग नहीं थे। विशेष ऑपरेशन के बाद ये संभव हो सका है। पिछले दस वर्ष में आईकेडीआरसी परिसर में सैकड़ों मरीजों का सफल ऑपरेशन हुआ है। इनमें से अधिकांश मां भी बन गईं हैं।
आईकेडीआरसी के निदेशक एवं गाइनेक विभागाध्यक्ष डॉ. विनीत मिश्रा ने बताया कि हजारों महिलाओं में से किसी एक को जन्म से ही योनिमार्ग नहीं होने की समस्या होती है। इस हालत में इनके मां बनने की संभावना नहीं होती है। उन्होंने कहा कि पिछले काफी वर्षों आईकेडीआरसी में इस तरह का उपचार हो रहा और उनमें से चार सौ से अधिक महिलाएं का सफल ऑपरेशन भी हुआ है।
डॉ. मिश्रा के अनुसार ये वो मरीज होती हैं जिनके गर्भाशय और अंडाशय तो होता है लेकिन योनिर्मा नहीं होता है। जिसके चलते उनका मां बनना मुमकिन नहीं होता है। इस तरह की समस्या में दस से तेरह वर्ष की आयु में उपचार किया जाना बेहतर होता है। इसमें प्लास्टिक सर्जरी कर योनि मार्ग बनाकर उसे गर्भाशय ेसे जोड़ा जाता है। जिसके बाद वे मां बनने में सक्षम हो जाती हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रति वर्ष यहां लगभग चालीस से अधिक सफल ऑपरेशन होते हैं। दस वर्षों में इनकी संख्या चार सौ से अधिक हो गई है। इनमें से ज्यादातर मां भी बन गईं हैं। किडनी अस्पताल में पहुंचने वाली महिला मरीजों में गुजरात के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश की शामिल हैं।
पांच के नहीं थे गर्भाशय
इंस्टीट्यूट में उपचार के बाद ऐसी पांच महिलाओं ने भी बच्चों को जन्म दिया है जिनके जन्मजात गर्भाशय नहीं था। डॉ. विनीत मिश्रा के अनुसार इस तरह की पांचों महिलाओं के अन्य अंग जैसे अंडाशय व योनिमार्ग सामान्य महिलाओं की ही तरह थे। चिकित्सक का कहना है कि इन महिलाओं के बीज अन्य महिलाओं में सरोगेट कर उन्हें मां बनने का गौरव मिला है। जो पांच महिलाएं यहां मां बनी हैं उनकी सरोगेट महिलाएं उनकी (मरीज की) माता हैं। अर्थात अपनी मां की कोख से ही वे अपने बच्चों की मां बन सकी हैं।
Published on:
16 Dec 2018 10:20 pm
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