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बोन मैरो ट्रान्सप्लान्ट से 150 बच्चे हुए थैलेसीमिया मुक्त

देश में हर वर्ष थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं दस हजार बच्चे अन्य देशों के मुकाबले सस्ते उपचार का दावा

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बोन मैरो ट्रान्सप्लान्ट से 150 बच्चे हुए थैलेसीमिया मुक्त

बोन मैरो ट्रान्सप्लान्ट से 150 बच्चे हुए थैलेसीमिया मुक्त

अहमदाबाद. ब्लड डिसऑर्डर संबंधित रोगों में थैलेसीमिया बड़ी समस्याओं में से एक है। देश में हर वर्ष दस हजार से अधिक बच्चों का जन्म मेजर थैलेसीमिया के साथ होता है। इन मामलों में अधिकांश बच्चों के अभिभावकों के यह भी पता नहीं होता है कि उनके बच्चे गंभीर स्थिति के साथ जी रहे हैं। शहर के सिम्स अस्पताल में विविध संस्थाओं के सहयोग से 150 बच्चों को बोन मैरो ट्रान्सप्लान्ट के माध्यम से थैलेसीमिया से मुक्त करने का दावा किया गया है।
शहर के सिम्स मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एवं संकल्प इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में बोनमैरो ट्रान्सप्लान्ट के माध्यम से वर्ष 2017 से अब तक 150 बच्चों का उपचार किया गया है। संस्था की पीडियाट्रिक यूनिट की निदेशक डॉ. दीपा त्रिवेदी ने बताया कि सखावती सहयोग के अन्तर्गत मरीज और उनके अभिभावकों के विविध पहलुओं को ध्यान में रखकर उपचार किया जाता है। डेढ़ सौ बच्चों का बोनमैरो ट्रान्सप्लान्ट के अलावा 80 से अधिक बच्चे इस उपचार के लिए प्रतिक्षा सूची में भी हैं। उनका कहना है कि 8.6 वर्ष की औसत आयु के 129 मरीजों को संपूर्ण रूप से मैच हो ऐसे दाता का ट्रान्सप्लान्ट ऑफर किया गया था। जिसमें औसतन सर्वाइकल रेट 96 फीसदी थी, जबकि 8.1 की औसतन आयु वाले 21 बच्चों को अंशत: मेच होने से होने वाले डॉनर ट्रान्सप्लान्ट के लिए ऑफर किए गए। फाउंडेशिन और क्योर चिल्ड्रन मेडिकल के निदेशक डॉ. लॉरेंस फॅाकनर के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का बोनमैरो ट्रान्सप्लान्ट होना बड़ी उपलब्धि है। उनका दावा है कि पश्चिम देशों की तुलना में यह काफी कम खर्च में उपचार हुआ है। फाउंडेशन के प्रेसिडेंट ललित परमार ने बताया कि दाताओं और टीम के अथग प्रयास के कारण यह सफलता मिल सकी है।

परिवारों को 35 फीसदी राशि करनी होती है वहन
अस्पताल के अनुसार परिवार में से संपूर्ण रूप से मैच होने वाले डॉनर ट्रान्सप्लान्ट में एक बोन मैरो ट्रान्सप्लान्ट की सबसिडी के साथ खर्च नौ लाख रुए होता और अंशत: मैच होने वाले मामलों में डॉनर ट्रान्सप्लान्ट का खर्च 14 लाख रुपए है। बच्चों के परिवारों को पूरे खर्च का लगभग 35 फीसद चुकाना होता है। जबकि गुजरात सरकार की ओर से 25 फीसदी और शेष 40 फीसदी खर्च संकल्प इंडिया फाउंडेशन और उसके दाताओं के माध्यम से चुकाया जाता है।

500 रुपए का टेस्ट हो सकता है महत्वपूर्ण साबित
अस्पताल के क्रिटीकल केयर (बाल विभाग) डॉ. अमित चीतलिया के अनुसार माइनर थैलेसीमिया वाले दंपत्ति में से महिला को गर्भवस्था के दौरान 500 रुपए का टेस्ट महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। लेकिन जानकारी के अभाव में ऐसा नहीं हो पाता है। दूसरी ओर थैलेसीमिया के लिए बोनमैरो ट्रान्सप्लान्ट करने से पहले ह्युमन ल्यूकोसाइट एन्टीजन (एचएलए) टेस्ट कराने की जरूरत होती है।