
कच्छ के बन्नी क्षेत्र की भैंस चैम्पियन ऑफ द शो बनी।
राजकोट. गुजरात की प्रगति के नींव समान पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए हर साल की भांति इस साल भी सुरेंद्रनगर जिले की थानगढ़ तहसील के तरणेतर में लोक मेले के दौरान पशुपालन विभाग की ओर से पशु प्रदर्शन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
18 से 20 सितंबर तक आयोजित पशु प्रदर्शन प्रतियोगिता में गाय श्रेणी में 59, कांकरेज गाय में 39, जाफराबादी भैंस श्रेणी में 38 और बन्नी भैंस श्रेणी में 32 मवेशियों ने पंजीकरण के बाद हिस्सा लिया।
इस प्रतियोगिता के आयोजन का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए पशुपालन निदेशक डाॅ. फाल्गुनी ठाकर ने कहा कि इस तरह की पशु प्रदर्शन प्रतियोगिताएं स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने में वरदान हैं। पशुपालकों के लिए अपने पशु का सम्मान पुरस्कार से अधिक महत्वपूर्ण है।
कच्छ के बन्नी क्षेत्र की भैंस को चैंपियन ऑफ द शो घोषित किया गया। पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के हाथों कच्छ जिले के भुज तहसील के धोरी गांव निवासी रणछोड़ वलजी गागल की बन्नी भैंस को 51 हजार का पुरस्कार और चैंपियन ऑफ द शो ट्रॉफी प्रदान की गई।
इसके अलावा गाय में वोदकी, गाय और सांढ जबकि भैंस में जोट्टू (खडेली) और पाड़ा सहित दोनों श्रेणियों में विजेताओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
प्रत्येक श्रेणी श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के 25 हजार रुपए, द्वितीय पुरस्कार के 20 हजार रुपए तथा तृतीय पुरस्कार के 15 हजार का भुगतान किया गया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रत्येक मवेशी को सांत्वना पुरस्कार के 2 हजार का भुगतान किया गया।
मवेशियों की परिवहन लागत के लिए वित्तीय सहायता
मवेशियों की परिवहन लागत के लिए पशुपालकों को पशुपालन निदेशक के कार्यालय की ओर से वित्तीय सहायता भी दी गई। थान, चोटीला हलवद, वांकानेर और मूली तहसील के लिए 700 रुपए का भुगतान किया गया।
राजकोट, सुरेंद्रनगर और मोरबी जिले की अन्य तहसील के मवेशियों के लिए 2,000 रुपए का भुगतान किया गया। अन्य जिलों से आने वाले मवेशियों के परिवहन के लिए 4,000 रुपए का भुगतान किया गया।
इसके अलावा भाग लेने वाले प्रत्येक मवेशी के लिए 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से दैनिक भत्ता दिया गया। इस प्रकार अपनी स्वदेशी संस्कृति के लिए विश्व प्रसिद्ध तरणेतर मेला राज्य के स्वदेशी पशुधन के संरक्षण का एक प्रदर्शन स्थल बना है।
2008 में शुरुआत
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पशु प्रदर्शन प्रतियोगिता आरंभ की गई। इस साल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व एवं निर्देशन में यह प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता का उद्देश्य शुद्ध देशी नस्ल के उच्च गुणवत्ता वाले गिर व कांकरेज की गाय और जाफराबादी व बन्नी भैंस के पालन को प्रोत्साहन देना है।
Published on:
20 Sept 2023 11:02 pm
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