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बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट : भूमि अधिग्रहण-मुआवजे को लेकर केन्न्द्र ने पल्ला झाड़ा

-कहा, केन्द्र सरकार का कोई लेना-देना नहीं -एक हजार किसान विरोध कर चुके हैं एक हजार किसान

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बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट : भूमि अधिग्रहण-मुआवजे को लेकर केन्न्द्र ने पल्ला झाड़ा

अहमदाबाद. केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत किसानों की ओर से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया व उचित मुआवजे के मुद्दे पर फिलहाल अपना पल्ला झाड़ लिया है।
केन्द्र सरकार ने गुजरात उच्च न्यायालय को यह बताया है कि इस प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार के जिम्मे है और इस मुद्दे पर केन्द्र का कोई लेना-देना नहीं है।
केन्द्र के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग के अवर सचिव प्रकाश चंद्र मीणा की ओर से पेश हलफनामे में यह भी कहा गया कि इस मामले में गुजरात सरकार ने भूमि अधिग्रहण व मुआवजे से जुड़े गुजरात संशोधन अधिनियम के तहत अधिसूचना जारी की है। राज्य सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में केन्द्र सरकार का फिलहाल कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। इसलिए इस मामले में फिलहाल केन्द्र किसी तरह की दलील नहीं कर सकती।
केन्द्र की ओर से छह सप्ताह बाद दिए गए जवाब में यह कहा गया कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने केन्द्र के खिलाफ किसी तरह का आरोप नहीं लगाया है और न ही केन्द्र से किसी तरह की राहत की मांग की गई है। इसलिए इसे देखते हुए केन्द्र सरकार फिलहाल किसी भी तरह की टिप्पणी से बच रही है, हालांकि जरूरत पहने पर केन्द्र सरकार बाद में अपना जवाब पेश कर सकती है।
हलफनामे में कहा गया कि केन्द्र सरकार ने यचिकाकर्ताओं के किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं किया है इसलिए यह याचिका मान्य नहीं रखी जाए।
केन्द्र के हलफनामे के अनुसार किसानों ने केन्द्र के भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के किसी भी प्रावधानों को चुनौती नहीं दी है। जहां तक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की बात है, यह प्रक्रिया फिलहाल आरंभ हुई है और इसमें अभी सिर्फ प्राथमिक अधिसूचना जारी की गई है। यदि किसानों को मुआवजे की राशि या भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध है तो किसान अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत विरोध जता सकते हैं जिसके तहत समाधान का भी विकल्प है। याचिकाकर्ता शुरुआत में ही उच्च न्यायालय पहुंच गए हैं और इसलिए इस मामले में किसी तरह की अगली कार्रवाई नहीं होने तक ये याचिकाकर्ता प्रभावित नहीं माने जा सकते।
यह जवाब मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के गत सुनवाई के दौरान निर्देश के बाद दिया गया। मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।
इससे पहले गत सुनवाई के दौरान बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के खिलाफ गुजरात के एक हजार प्रभावित किसानों ने गुजरात उच्च न्यायालय में शपथपत्र पेश किया।
गुजरात के 8 जिलों के प्रभावित किसानों की ओर कहा गया था कि वे अपनी जमीन का अधिग्रहण नहीं करने देना चाहते और इसलिए वे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का पूरी तरह विरोध करते हैं। सूरत के कुछ किसानों ने इस प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण, मुआवजे और इससे जुड़े गुजरात अधिनियम के कुछ प्रावधानों को अवैध ठहराए सहित कई मांगों को लेकर याचिकाएं दायर की है।