
बुलेट ट्रेन मार्ग में आने वाले हटाए जाएंगे 4 हजार पेड़
गांधीनगर. अहमदाबाद से मुंबई के बीच दौडऩे वाली बुलेट ट्रेन (bullet train) के रास्ते में साठ हजार से ज्यादा पेड़ (tree) हैं, जिनमें करीब 25 हजार पेड़ों को पुन: स्थापित (transplant) किया जा जा सकेगा। यदि अहमदाबाद की बात की जाए तो साबरमती से वटवा तक करीब चार हजार पौधों (plants) को ट्रांसप्लांट किए जाएंगे, जिसमें अब तक छह सौ से ज्यादा पेड़ दूसरे स्थान पर पुन: स्थापित किए जा चुके हैं। सबसे ज्यादा पेड़ वटवा और साबरमती (sabarmati) में स्थानांतरित किए जाएंगे। इस मार्ग पर चालीस फीसदी से ज्यादा ऐसे पेड़ हैं जिनको ट्रांसप्लांट किया रहा है।
नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (National high speed rail corporation) की प्रवक्ता सुष्मा गौर के मुताबिक बुलेट ट्रेन परियोजना में अस्सी फीसदी से ज्यादा जमीन अधिग्रहण का कार्य पूर्ण हो चुका हैं। अब इस मार्ग पर पेड़ों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है। अहमदाबाद से वटवा तक करीब 30 किलोमीटर के इस मार्ग पर चार हजार से ज्यादा पेड़ हैं। इन पेड़ों को हटाने का कार्य चल रहा है। अब तक छह सौ से ज्यादा पेड़ों को मशीन के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान रोपित किया जा चुका है। वहीं कई ऐसे पेड़ जिनको रोपित नहीं किया जा सकता है ऐसे पेड़ों को अहमदाबाद महानगरपालिका और वन विभाग की मंजूरी के बीच काटा जाएगा। हालांकि जितने भी पेड़ काटे जाएंगे उसके एवज में दस गुना पेड़ लगाए जाएंगे। मतलब कि एक पेड़ काटा जाएगा तो उसके एवज में स्थानीय प्रशासन की ओर से दस पौधे रोपे जाएंगे। मशीन के जरिए 90 से.मी. व्यास वाले पेड़ों को उखाड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर रोपित किया जा सकता है। हालांकि इस मार्ग पर बरगद या कोई घनेदार पेड़ नहीं है। इसके चलते पेड़ों को पुन: स्थानांतरित करने में कोई खास दिक्कत नहीं है।
नहीं काटे मैन्ग्रोव के पेड़
थाणे बुलेट ट्रेन स्टेशन बनाने में 53 हजार मैनग्रोव के पेड़ प्रभावित हो रहे थे, लेकिन नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल ने इस स्टेशन की डिजाइन में बदलाव किया। इसके चलते अब 53 हजार के बजाय सिर्फ 32,044 ही मैनग्रोव पेड़ कटेंगे। 21 हजार मैनग्रोव को बचाया जा सकेगा। इस परियोजना से जितने भी मैनग्रोव प्रभावित होंगे उसके एवज में 1 गुना 5 के अनुपात में कंपनी राशि जमा कराएगी। इसके लिए कंपनी ने बकायदा मैनग्रोव प्रकोष्ठ बनाया है, जिसमें यह राशि जमा होगी। यूं कहा जा सकता है कि यदि एक पेड़ कटेगा तो इसके एवज पांच पेड़ कंपनी लगाएगी। इसके लिए मैन्ग्रोव प्रकोष्ठ बनाया गया है, जिसमें एक गुना पांच के हिसाब से राशि जमा की जा रही है। जैसे कि 32044 मैनग्रोव प्रभावित होंगे उसके एवज में 1,60,000 मैनग्रोव नए लगाए जाएंंगे और इसका जो खर्चा है एनएचएसआरसीएल वहन करेगी।
Published on:
30 Jul 2020 09:49 pm
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