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सुरेंद्रनगर जिले में डामर भरे टैंकर से टकराई बस, आग में चार जिंदा जले, 10 घायल

सो रहे यात्रियों में मची चीख-पुकार, स्थानीय लोगों ने शीशे तोड़कर बचाईं कई जानें, कुछ यात्री खिड़की से कूदे, चोटीला-राजकोट नेशनल हाईवे पर हादसे में बस जलकर खाक, मृतकों में अहमदाबाद का दंपती शामिल

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Bus Collides with Asphalt Tanker in Surendranagar District; Four Burned Alive, 10 Injured

आग में खाक बस।

सो रहे यात्रियों में मची चीख-पुकार, स्थानीय लोगों ने शीशे तोड़कर बचाईं कई जानें, कुछ यात्री खिड़की से कूदे, चोटीला-राजकोट नेशनल हाईवे पर हादसे में बस जलकर खाक, मृतकों में अहमदाबाद का दंपती शामिल

राजकोट. सुरेंद्रनगर जिले में सांगाणी गांव के पास बुधवार मध्यरात्रि बाद करीब 1:30 बजे डामर से भरे टैंकर से निजी बस टकराने के बाद बस में भीषण आग लगने से चार यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। वहीं बस में सवार 10 अन्य यात्री घायल हो गए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मृतकों में अहमदाबाद के दंपती जबार खींची (60) और उनकी पत्नी नसीम (55) तथा जूनागढ़ का बस चालक सिद्धार्थपुरी उर्फ लालाभाई गोस्वामी शामिल हैं। चौथे मृतक की पहचान नहीं हो सकी। दंपती बुधवार रात 9 बजे बस में सवार हुए थे और जूनागढ़ में किसी पारिवारिक कार्यक्रम में जा रहे थे। वे चालक के पीछे की सीट पर सवार थे।
जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद से राजकोट होकर आंकोलवाड़ी (जूनागढ़-गिर) जा रही निजी बस जब चोटीला-राजकोट नेशनल हाईवे पर सांगाणी गांव के पास पहुंची, तभी आगे चल रहे डामर से भरे टैंकर का अचानक टायर फट गया। टायर फटने से टैंकर का संतुलन बिगड़ गया और पीछे से तेज रफ्तार से आ रही बस के चालक ने नियंत्रण खो दिया। इस कारण टैंकर के पिछले हिस्से से बस टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि हादसे के तुरंत बाद बस में शॉर्ट सर्किट हो गया। टैंकर में ज्वलनशील डामर भरा होने और बस की वायरिंग से निकली चिंगारियों के कारण देखते ही देखते पूरी बस आग की चपेट में आ गई। रात का समय होने के कारण अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। यात्री कुछ समझ पाते या बाहर निकलने का रास्ता ढूंढते, उससे पहले ही आग ने विकराल रूप ले लिया।
घटनास्थल के पास पेट्रोल पंप संचालक अजय मेवाड़ा ने बताया कि हादसे की आवाज सुनते ही वे तुरंत फायर सेफ्टी सिलेंडर लेकर मौके पर पहुंचे। हालांकि टैंकर से डामर बह रहा था, जिससे आग लगातार फैलती जा रही थी और काबू में नहीं आ रही थी।

स्थानीय लोगों ने 25 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला

भीषण आग के बावजूद स्थानीय लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। इन लोगों ने पाइप और लकड़ी के डंडों की मदद से बस के शीशे तोड़कर करीब 20 से 25 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ यात्री खिड़की से कूदे। घटना की सूचना मिलते ही चोटीला और आसपास के इलाकों से फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। चोटीला के प्रांत अधिकारी एच.टी. मकवाणा ने बताया कि बस में करीब 35 से 40 यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकांश को बचा लिया गया। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए चोटीला रेफरल अस्पताल पहुुंचाया गया।

बीएसएफ जवान का हाथ झुलसा

झुलसे यात्रियों में सुरेंद्रनगर के लिमडी निवासी नरेंद्र राठौड़ भी शामिल हैं जो पूर्वोत्तर में बीएसएफ में तैनात हैं। वे छुट्टी पर आए थे और गिर सोमनाथ के तलाला में दर्शन के लिए जा रहे थे। हादसे के दौरान उन्होंने खिड़की का शीशा तोड़कर छलांग लगाई और अपनी जान बचाई। साथ ही अन्य यात्रियों को बचाने में भी मदद की। फिलहाल उनका हाथ झुलस गया और उनका इलाज राजकोट सिविल अस्पताल में चल रहा है।

नींद से जागे यात्री, मची अफरा-तफरी

बस में आग लगते ही नींद में सो रहे यात्री जाग गए और उनमें अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए कई यात्रियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर छलांग लगा दी, जिससे कुछ को चोटें आईं।