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2040 तक स्पेस के हर क्षेत्र में अग्रणी देशों के समकक्ष होगा भारत: डॉ.वी.नारायणन

-जीयू के 74वें दीक्षांत समारोह में 40245 विद्यार्थियों को प्रदान की डिग्री, राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं

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GU 74th Convocation

Ahmedabad. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ.वी.नारायणन ने कहा कि साइकिल पर रॉकेट और बैलगाड़ी में सेटेलाइट ले जाने से अंतरिक्ष क्षेत्र का सफर शुरू करने वाला भारत वर्ष 2040 तक स्पेस के हर क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों के समकक्ष होगा। फिर चाहे वह लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी हो, स्पेस क्राफ्ट टेक्नोलॉजी हो, एप्लीकेशन हो या ह्यूमन स्पेस सिस्टम। वर्ष 2047 विकसित भारत में इसरो अहम योगदान देगा।

वे सोमवार को गुजरात विश्वविद्यालय (जीयू) के 74वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि पद से संबोधित कर रहे थे। समारोह में 40245 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।उन्होंने अपने दीक्षांत वक्तव्य में कहा कि भारत अपना स्पेस स्टेशन बना रहा है। ह्यूमन स्पेस प्रोग्राम पर काम कर रहा है। चंद्रयान और मंगल मिशन जैसी सफलताएं, यह सिद्ध करती हैं कि भारत की शिक्षा प्रणाली और प्रतिभा विश्व में किसी से कम नहीं है।

ऑपरेशन सिंदूर में कार्यरत थे 25 सेटेलाइट

इसरो अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2025 में छेड़े गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के 25 सेटेलाइट कार्यरत थे।

गगनयात्रियों को सुरक्षित भेजने में भारत का योगदान

इसरो अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला व तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को सफलता पूर्वक अंतरिक्ष में भेजने में भारतीय लोगों का अहम योगदान था। उन्हें जो रॉकेट ले जा रहा था। उसमें लीकेज की समस्या थी। वह भारतीय लोग थे, जिन्होंने केनेडी स्पेस सेंटर पहुंचकर रॉकेट को अंतिम क्षण में रुकवाया। जिससे उन्हें सुरक्षित भेजा गया। इस बात ने साबित किया भारतीय शिक्षा पद्धति किसी के कम नहीं है। हमने अंतिम समय में अलग देश के सेटेलाइट को रुकवाया।

हमें नहीं दी गई क्रायोजेनिक तकनीक, बनाए तीन रेकॉर्ड

इसरो अध्यक्ष ने कहा कि स्पेस क्षेत्र के अग्रणी देशों ने भारत को क्रायोजेनिक टेक्निक देने से इनकार कर दिया था। मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने ऐसा किया। आज हमने तीन क्रायोजेनिक प्रपोल्सन सिस्टम विकसित किए हैं। इतना ही नहीं इस क्षेत्र में तीन वर्ल्ड रेकॉर्ड भी बनाए हैं। भारत आज स्पेस के 10 क्षेत्रों में विश्व में नंबर वन है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रोफेशनल, पर्सनल लाइफ में बैलेंस रखने, परिजन को हमेशा खुश रखने और लगातार सीखते रहने की बात कही।

सफलता का ‘शॉर्टकट’ नहीं, परिश्रम ही रास्ता: राज्यपाल

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। परिश्रम ही एकमात्र रास्ता है। बुद्धिपूर्वक और परिश्रमपूर्वक किया गया पुरुषार्थ कभी निष्फल नहीं जाता। उन्होंने जीयू की ओर से तैयार ‘कॉफी टेबल बुक’ का विमोचन किया। विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले दो स्टार्टअप और एक खिलाड़ी को ‘गौरव पुरस्कार’ प्रदान किए। मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और छात्रवृत्ति प्रदान की। इस दौरान कुलपति डॉ.नीरजा गुप्ता, आइआइएम-ए के निदेशक प्रो.भरत भास्कर, कार्यकारी कुलसचिव डॉ.पी.एम.पटेल एवं बड़ी संख्या में छात्र, प्राध्यापक उपस्थित रहे।