
Ahmedabad News अनुदान उपयोग में आलसी साइंस सिटी, आईएसआर और जीआईएल, लौटाई भी नहीं रकम
अहमदाबाद. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गुजरात काउंसिल ऑफ साइंस सिटी (साइंस सिटी), भूकंप अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) और गुजरात इन्फॉर्मेटिक्स लिमिटेड (जीआईएल) अनुदान का उपयोग करने में काफी आलसी हैं। इतना ही नहीं उपयोग में नहीं ली गई राशि को लौटाने को लेकर भी गंभीर नहीं है। जिसके चलते २०१३-१४ से २०१६-१७ के दौरान १०९ करोड़ की राशि बिना उपयोग के ही पड़ी रही। डीएसटी के पास ही ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जो सुनिश्चित करे कि गैर उपयोगी फंड वित्त वर्ष पूर्ण होने पर वापस आ जाए।
गुजरात विधानसभा में बुधवार को पेश की गई नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की ओर से वर्ष २०१३-१४ से २०१७-१८ के दौरान तेजी से उभर रहे प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहन देने के लिए छह विज्ञान से जुड़़ी संस्थाओं को ११३२.०६ करोड़ रुपए का अनुदान आवंटित किया था। इसमें से इन संस्थाओं ने ९५०.८४ करोड़ की ही राशि खर्च की। शेष रही राशि को वित्त वर्ष के खत्म होने पर डीएसटी को नहीं लौटाया। जिसके चलते १०९.९४ करोड़ रुपए की राशि बिना वजह यूं ही अटकी रही।
इन संस्थाओं में सामने आई ये चूक
-साइंस सिटी के अप्रेल २०१८ के ऑडिट के दौरान ध्यान में आया कि वर्ष २०१३-१४ से २०१७-१८ के दौरान साइंस सिटी को प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के लिए डीएसटी ने १०६.७५ करोड़ का अनुदान दिया था, जिसमें से पांच साल में सिर्फ ४१.२६ करोड़ रुपए ही खर्च हुए। शेष ६५.३७ करोड़ रुपए साइंस सिटी ने डीएसटी को नहीं लौटाए।
-विज्ञान को प्रचलित करने के लिए डीएसटी ने साइंस सिटी को २०१३-१४ से १७-१८ के दौरान डीएसटी ने २६.८१ करोड़ रुपए दिए थे। इसमें से १९.५७ करोड़ ही खर्च हुए।
-आईएसआर को डीएसटी ने २०१३-१४ के दौरान भूकंप शोध के लिए ६९.७९ करोड़ का अनुदान दिया था। जिसमें से ४१.४६ करोड़ खर्च हुए। ऑडिट में ध्यान में ५४.७५ करोड़ की राशि शोध योजनाओं के लिए आवंटित की हैं। इसमें से इंस्टीट्यूट ने २० करोड़ यानि केवल ३६.५३ प्रतिशत राशि का उपयोग किया। मार्च २०१७ की स्थिति में ३४.७५ करोड़ बिन उपयोगी रहे। इंस्टीट्यूट ने २०१३-१४ से २०१६-१७ के दौरान मिले अनुदान के पूरे-पूरे उपयोग होने का प्रमाण-पत्र डीएसटी को भेजा था, जो सही नहीं पाया गया, क्योंकि उसमें वास्तविक खर्च का उल्लेख ही नहीं है।
-डीएसटी ने जीआईएल को सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों को सीसीसी प्लस के प्रशिक्षण के लिए २०१४-१५ से २०१६-१७ के दौरान २.७५ करोड़ दिए थे, जिसमें से मार्च २०१७ तक सिर्फ १७ लाख खर्च हुए।
Published on:
11 Dec 2019 10:22 pm
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