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जीआईएल के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर, एक्जीक्यूटिव अकाउंटेंट विरुद्ध सत्ता के दुरुपयोग का मामला दर्ज

एसीबी को प्राथमिक जांच में हाथ लगे अहम सबूत, सरकार को 67.81 लाख की चपत लगाने का आरोप

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ACB Gujarat

गुजरात भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुजरात इन्फोर्मेटिक्स लिमिटेड (जीआईएल) गांधीनगर के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर (सर्विस) व जीएम (अकाउंट) समीर मेहता, व तत्कालीन एक्जीक्यूटिव अकाउंटेंट रुचि भावसार के विरुद्ध सत्ता के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया है। प्राथमिक जांच में इनके विरुद्ध सबूत हाथ लगे हैं। इन पर सत्ता का दुरुपयोग करते हुए कंपनी को 67.81 लाख रुपए की चपत लगाने का आरोप है।

मामले के तहत जीआईएल के वर्ष 2017-18 के कार्य के हिसाब किताब की जांच में सामने आया कि समीर मेहता और रुचि भावसार सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद इन्होंने सोनी ट्रैवल्स के मालिक अश्विन सोनी के साथ मिलकर पेमेंट रिकमंडेशन वाउचर (पीआरवी) में दर्शायी गई राशि से ज्यादा राशि चुकाई होने का पता चला है। कई अज्ञात संस्था व अनधिकृत विक्रेताओं को भी फर्जी तरीके से राशि चुकाने के सबूत हाथ लगे हैं।

बैंक में पेश चेक, फाइल पर दी गई मंजूरी और पीआरवी वाउचर में जीआईएल कंपनी की ओर से तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर समीर मेहता के हस्ताक्षर मिले हैं। मेहता और रुचि भावसार अकाउंट विभाग के कर्मचारी थे, उनकी जिम्मेदारी थी कि वे हिसाब किताब का रेकॉर्ड रखें और जांच करते हुए पैसों का भुगतान करें। कोई विसंगतता मिले तो कार्यवाही करें, लेकिन इन्होंने इसमें लापरवाही बरती है।

2017-18 में 44 बैंक ट्रांजेक्शन से भेजे पैसे

जांच में पता चला कि वर्ष 2017-18 में 44 अलग अलग बैंक ट्रांजेक्शन करते हुए मेहता व रुचि ने जीआईएल कंपनी को 67.81 लाख रुपए का नुकसान पहुंचाया है। सरकारी रुपए सोनी ट्रैवल्स के मालिक अश्विन सोनी व अनधिकृत वेन्डरों के साथ षडयंत्र रचते हुए कंपनी की संपत्ति का आपराधिक उपयोग करते हुए और विश्वासघात करते हुए विक्रेताओं के हित में भुगतान कर दिए, जिससे कंपनी को नुकसान हुआ। इसमें भ्रष्टाचार किया है। यह तथ्य सामने आने पर इनके विरुद्ध एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज की है।