
गांधीनगर. राज्य के बनासकांठा जिले में स्थित डीसा में पाकिस्तान सीमा के निकट भारतीय वायु सेना का नया एयरबेस स्थापित होगा। केन्द्र सरकार की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) ने वायु सेना के फॉरवर्ड फाइटर बेस की योजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने यह निर्णय लिया है। इस निर्णय से भारत की पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य क्षमता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने डीसा में भारतीय वायु सेना के एयरबेस की मंजूरी पर खुशी जताई है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक युद्ध के दौरान एयरबेस की महत्ता काफी बढ़ जाती है। यहां पर डिटैचमेंट लगा दिया जाता है। इस कारण यहां से दुश्मन देश से मुकाबला करने में आसानी होती है।
वायु सेना के एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) पी.के.देसाई ने बताया कि सरकार की ओर से उठाया गया यह कदम काफी अच्छा है। हालांकि इसकी योजना पहले से चल रही थी।
डीसा राजस्थान के बाड़मेर व गुजरात में कच्छ जिले के नलिया के बीच रणनीतिक रूप से अहम रूप से स्थित है। डीसा पर हवाई पट्टी काफी दिनों से बंद पड़ी थी। अब इसे वायु सेना को संचालन के लिए दिया गया है।
डीसा गांधीनगर स्थित दक्षिण पश्चिम वायु कमान (स्वैक) मुख्यालय के तहत नौंवा एयरबेस है। स्वैक के अधीन गुजरात, महाराष्ट्र व राजस्थान के एयरबेस आते हैं।
बताया जाता है कि डीसा के छोटे सी हवाई पट्टी को वायु सेना के एयरबेस बनाने के लिए करीब एक हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा। पूर्ण रूप से एयरबेस बनाने के लिए 4 हजार करोड़ की रकम की जरूरत होगी। एक हजार मीटर रनवे को और लंबा किया जाएगा। एयरबेस के लिए दो दशक पहले ही 4 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी। फिलहाल इस हवाई पट्टी का उपयोग वीवीआईपी आवागमन व हेलिकॉप्टर लैंडिंग के लिए उपयोग में लिया जा रहा है।
Published on:
24 Mar 2018 09:48 pm
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