
बच्चे का सफल ऑपरेशन करने वाली सिविल अस्पताल के चिकित्सकों की टीम एवं बच्चों के परिजन।
Ahmedabad. साबुन बनाने में उपयोग में लिए जाने वाले केमिकल का एक घूंट पीने पर राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले तीन वर्षीय बालक अयान की अन्ननली सिकुड़ गई। अन्ननली को चौड़ा करने का हर प्रयास विफल रहा। ऐसे में अहमदाबाद सिविल अस्पताल के बालरोग सर्जरी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने जटिल गैस्ट्रिक पुल‑अप सर्जरी कर बच्चे को नया जीवन दिया।
साबुन बनाने का काम करने वाले जोधपुर के सराफत अली के पुत्र अयान ने 14 फरवरी 2025 को दादा के घर खेलते समय साबुन बनाने वाला केमिकल पी लिया। इसके बाद से उसे भोजन निगलने में कठिनाई होने लगी। कई अस्पतालों में उपचार कराया, लेकिन स्थिति बिगड़ती गई। जांच में पता चला कि अन्ननली गंभीर रूप से जल कर अत्यधिक संकरी हो गई है। बच्चे को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में रेफर किया गया। यहां पहले फीडिंग गैस्ट्रोस्टोमी कर पेट में सीधे भोजन पहुंचाने की व्यवस्था की गई। खराब अन्ननली को बाहर निकाला गया। महीनों तक पोषण और वजन बढ़ाने की तैयारी कराई गई। इसके बाद गत 20 मई को अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. राकेश जोशी एवं डॉ. जयश्री रामजी व उनकी टीम, एनेस्थेसिया विभाग की प्रोफेसर डॉ. सीमा गांधी ने बालक की जटिल गैस्ट्रिक पुल‑अप सर्जरी की।
इस सर्जरी के बाद अयान बिना किसी कठिनाई के फिर से मुंह से खाना खाने लगा है। अभी उसकी स्थिति संतोषजनक है। उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। पूरी उपचार प्रक्रिया को सिविल अस्पताल में नि:शुल्क किया गया।चिकित्सा अधीक्षक डॉ.राकेश जोशी ने बताया कि यह केवल एक सफल ऑपरेशन ही नहीं है, बल्कि माता‑पिता के लिए चेतावनी वाली घटना है। घर में मौजूद सभी प्रकार की हानिकारक वस्तुओं कि जिसमें एसिड, क्षार, साबुन बनाने के केमिकल, फिनाइल, टॉयलेट क्लीनर को बच्चों की पहुंच से दूर किसी अलमारी में बंद करके रखना चाहिए।
गैस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी में जठर (पेट) को ऊपर खींचकर छाती के हिस्से में लाया जाता है। उससे नई अन्ननली बनाई जाती है। जब अन्ननली पूरी तरह नष्ट हो जाती है तो यह सर्जरी जीवनदायी साबित होती है। डॉ. जोशी ने बताया कि इस सर्जरी को जल्दबाजी में नहीं किया जा सकता। कई सावधानियां रखनी पड़ती हैं। ऑपरेशन से पहले बच्चे को गैस्ट्रोस्टोमी द्वारा पर्याप्त पोषण देकर वजन और ताकत बढ़ाई गई। पीडियाट्रिक सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, डाइटिशियन और आइसीयू टीम ने लगातार निगरानी की। माता‑पिता को पूरी प्रक्रिया, संभावित जोखिम और बाद की देखभाल के बारे में विस्तार से समझाया गया।
Published on:
13 Jun 2026 10:00 pm
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