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खंभात में वर्षों से घरों में कर रहे बरसाती पानी का संग्रह

वर्ष भर नहीं होती किल्लत, आरओ से भी शुद्ध पानी

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खंभात में वर्षों से घरों में कर रहे बरसाती पानी का संग्रह

आणंद. प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पीने के पानी की समस्या है और लोग पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं, लेकिन आणंद जिले के खंभात में पूर्वजों के दूरगामी परिणामों के चलते लोगों को आसानी से घर में ही शुद्ध पीने का पानी मिल रहा है। यहां करीब ५०० से अधिक पुराने मकानों में बरसाती पानी के संग्रह करने के लिए अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं, जिनमें मानसून के दौरान बरसाती पानी का संग्रह करते हैं और सालभर उसे पीते हैं।
नवाबी नगरी खंभात शहर समुद्रीतट पर होने के कारण यहां का भूगर्भ जल खारा एवं क्षारयुक्त है, जो पीने योग्य नहीं है। इसके बावजूद लोग खारे पानी को पीने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में नगर में करीब १५०-२०० वर्ष पूर्व पूर्वजों की ओर से ५०० से अधिक मकानों में बरसाती पानी के संग्रह के लिए टंकियां बनाई गई थी, जिनका फायदा नई पीढ़ी को मिल रहा है।


ऐसे करते हैं संग्रह :
खंभात की भूगर्भ टंकी की रचना विशेषकर गांवों में बरसाती पानी के संग्रह की महत्वपूर्ण पद्धति है। मकान की छत, छपरा या पतरे पर गिरनेवाले पानी पाइप से एकत्रित कर टंकी में पहुंचाया जाता है। इसके लिए जमीन में १५ फीट गहरा एवं १२ चौड़ा गड्ढा किया जाता है, जिसकी सीमेंट-चूने से चुनाई कर प्लास्टर किया गया है।
शहर में धनजीशा की पोळ में ५० मकानों में वर्षों पुरानी अंडरग्राउंड टंकियां हैं, जिसके कारण कभी पानी की किल्लत नहीं होती।


स्थानीय लोगों का कहना :

मितेश गांधी का कहना है कि माघ व स्वाति नक्षत्र का पानी बहुत शुद्ध माना जाता है, जो संग्रह करने से लम्बे समय तक टंकी का पानी शुद्ध रहता है। यह आरओ से भी अधिक शुद्ध एवं स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।


घरों में बनवानी चाहिएं अंडरग्राउंड टंकी :
स्थानीय जिगर पटेल के अनुसार खंभात में ९० प्रतिशत परिवारों में पूर्वजों की ओर से बरसाती पानी के संग्रह के लिए अंडरग्राउंड टंकियां बनाई गई है, जिनमें मकान की छत का पानी पाइप लाइन से पहुंचाया जाता है। यह पानी १२ महीने चलता है। आज गर्मी के मौसम में चारों ओर पानी की किल्लत है, ऐसे में सरकार को चाहित कि नए मकानों के निर्माण की डिजाइन में बरसाती पानी की संग्रह की टंकी बनाना आवश्यक करना चाहिए, जिससे बारिश का पानी व्यर्थ में नहीं बह सके।

सालभर करते हैं उपयोग :
नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्य गांधी के अनुसार पूर्वजों की ओर से बनाई गई टंकियों के पानी का उपयोग सालभर करते हैं। डेढ़ सौ वर्ष पूर्व बनाई गई यह टंकियां आज भी चालू हैं, सिर्फ मरम्मत करानी पड़ती है। ऐसे में सरकार को भी नए मकानों में इस प्रकार की टंकियां बनाना आवश्यक करना चाहिए।
स्थानीय गृहिणी पूर्वी पटेल ने बताया कि सामान्य रूप से खंभात में खारा पानी आता है, जिससे पथरी जैसे रोग हो जाते हैं। ऐसे में इन टंकियों में संग्रह होने वाला पानी शुद्ध एवं स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।