अहमदाबाद शहर के असारवा स्थित सिविल अस्पताल में चिकित्सकों ने दो जटिल और दुर्लभ सर्जरी में सफलता हासिल कर मरीजों को नया जीवन दिया। इन मरीजों में राजस्थान की एक महिला के गले से गांठ निकाली गई है जो दिमाग तक फैली हुई थी। इस तरह की गांठ 35 हजार में से किसी एक को हो सकती है। दूसरे मामले में वापी के युवक की किडनी से गांठ को सफलता पूर्वक निकाला गया।इनमें पहला मामला राजस्थान के उदयपुर निवासी 44 वर्षीय महिला का है, जो पिछले तीन वर्षों से गले की गांठ से पीड़ित थीं। पिछले दिनों उपचार के लिए उन्हें अहमदाबाद के सिविल अस्पताल लाया गया।
कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभागाध्यक्ष डॉ. इला उपाध्याय ने बताया कि महिला के गले में गांठ थी, जो मस्तिष्क तक रक्त ले जाने वाली मुख्य धमनियों से उत्पन्न होकर नीचे के हिस्से तक फैल गई थी। यह स्थिति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और लगभग 30 से 35 हजार लोगों में से केवल एक को ही ऐसी समस्या होती है। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो यह धमनियों को नुकसान पहुंचाकर लकवा, बोलने और खाने-पीने में कठिनाई जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। डॉ. उपाध्याय और उनकी टीम इस जटिल गांठ को सफलतापूर्वक हटाया। ऑपरेशन के बाद महिला की स्थिति सामान्य है और वे सामान्य रूप से बोल रही हैं और खाना-पीना भी कर रही हैं।
किडनी की गांठ अन्य अंगों पर बना रही थी दबाव
दूसरा मामला वापी के 35 वर्षीय युवक का है, जिसे पेट में दर्द और गांठ की शिकायत थी। जांच में उसकी एक किडनी में बड़ी गांठ की पुष्टि हुई। यह गांठ इतनी बड़ी हो गई कि आसपास के अंगों पर दबाव बना रही थी। यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. श्रेणिक शाह ने बताया कि पिछले दिनों लेप्रोस्कोपिक तकनीक से यह जटिल सर्जरी की गई और मरीज को राहत मिली।
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ . राकेश जोशी ने कहा कि यह सफलता साबित करती है कि अस्पताल आधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों की टीम के साथ गंभीर बीमारियों के इलाज में निरंतर अग्रणी है।