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Congress: भाजपा के मजबूत गढ़ गुजरात में ढाई दशक से सेंध नहीं लगा पा रही कांग्रेस 10101

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Congress: भाजपा के मजबूत गढ़ गुजरात में ढाई दशक से सेंध नहीं लगा पा रही कांग्रेस

उदय पटेल

अहमदाबाद. गुजरात में विधानसभा चुनाव को अब एक वर्ष बचे हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों तैयारियों में जुट गए हैं। गुजरात में भाजपा 1995 से हर विधानसभा चुनाव जीतती आ रही है। एक दो वर्षों को छोडक़र कांग्रेस राज्य में करीब 26 वर्षों से सत्ता से बाहर है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 77 सीटें हासिल की थी और सत्ता हथियाने से कुछ ही सीटों से रह गई थी। लेकिन इसके बाद पिछले लगातार 4 वर्षों में कांग्रेस को लगातार सभी चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है।
पार्टी को विधानसभा उप उपचुनाव, लोकसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव में लगाातार मुंह की खानी पड़ी है। पार्टी के कई विधायक भाजपा में शामिल हो गए। इस वर्ष स्थानीय निकाय चुनाव में भी कांग्रेस को पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस वजह से प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा और नेता प्रतिपक्ष परेश धानाणी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इस बीच कांग्रेस प्रभारी राजीव सातव की भी असमय मौत हो गई। अब कांग्रेस के पास पिछले 6-8 महीने से ज्यादा समय से नेतृत्व का संकट गहराता गया।
गत महीने जहां डॉ रघु शर्मा के रूप में नए कांग्रेस प्रभारी की नियुक्ति हुई वही नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जगदीश ठाकोर और नेता प्रतिपक्ष के रूप में सुखराम राठवा को नियुक्त किया गया। इस नियुक्ति पर फिलहाल कांग्रेस में किसी भी तरह के विरोध के स्वर नहीं दिख रहे हैं।

कांग्रेस को मिलते रहे हैं 33 फीसदी वोट

चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि 1995 के बाद जब से कांग्रेस सत्ता में नहीं है तब से पार्टी को करीब-करीब 33 फ़ीसदी से ज्यादा वोट हमेशा मिलता रहा है। विधानसभा चुनाव में लगातार कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ता जा रहा है लेकिन फिर भी वह सत्ता पर काबिज नहीं हो पा रही है। विधानसभा चुनावों में भाजपा व कांग्रेस के बीच करीब 9 से 10 फीसदी का अंतर रहा है। कांग्रेस को सत्ता पाने के लिए भाजपा को 15 फीसदी से ज्यादा वोट प्राप्त करने पड़ेंगे। हालांकि जहां तक लोकसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें तो दोनों के बीच वोट प्रतिशत में काफी अंतर दिखता है।
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विधानसभा चुनावों में वोटों का हिस्सा

विस चुनाव भाजपा कांग्रेस

1995 42.5% 32.9%
1998 44.8% 34.9%
2002 49.9% 39.3%
2007 49.1% 38%
2012 47.9% 38.9%
2017 49.1% 41.4%
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लोकसभा चुनाव

2014 59.1% 32.9%
2019 62.21% 32.11%

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पेश करनी होगी अहम चुनौती

गुजरात में कांग्रेस ढाई दशक से ज्यादा समय से सत्ता से बाहर है। यह राज्य भाजपा का मजबूत गढ़ बना चुका है। पार्टी पिछले लगातार छह टर्म से विधानसभा चुनाव जीत रही है। कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य में भाजपा के समक्ष चुनौती पेश करनी होगी। भाजपा संगठन में कांग्रेस से इक्कीस दिखती है। कांग्रेस में संगठन का अभाव दिखता है। हालांकि नए नेतृत्व के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ है।

नई नियुक्ति से कई वोटों पर नजर

जगदीश ठाकोर, सुखराम राठवा की नियुक्ति से कांग्रेस ओबीसी और आदिवासी वोट बैंक पर नजर है। वहीं निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश में है। पाटीदारों को रिझाने के लिए पार्टी हार्दिक पटेल पर निर्भर है।

कांग्रेस में मजबूत नेतृत्व की कमी

कांग्रेस में गुटबाजी का प्रभाव दिखता है। पार्टी में अलग-अलग ग्रुप बने हुए हैं। चुनाव के दौरान यह और ज्यादा प्रबल दिखती है। कांग्रेस का खुद का अपना कोई मजबूत नेता नहीं दिखता। जिस प्रकार गुजरात में नरेन्द्र मोदी ने लीडरशिप में बेंचमार्क स्थापित किया वह कांग्रेस में दूर-दूर तक नजर नहीं आता। कांग्रेस में प्लानिंग व मैनेजमेंट का अभाव दिखता है।

डॉ मुकेश खटीक, विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान, गुजरात विवि


मुद्दों के आधार पर चुनाव में उतरेगी कांग्रेस

भाजपा की तुलना में पार्टी का संगठन थोड़ा कमजोर है। भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति का मुंह तोड़ जवाब देने में पार्टी पिछड़ी है। उम्मीदवारों के चयन और फैसला करने में देरी के कारण भी नुकसान उठाना पड़ा है। लेकिन इन सभी के बावजूद कांग्रेस का कार्यकर्ता अडिग है। पार्टी इस बार मुद्दों के आधार पर चुनाव में जाएगी।

डॉ मनीष दोशी, मुख्य प्रवक्ता, गुजरात प्रदेश कांग्रेस