
फाइल फोटो।
ahmedabad: गुजरात प्रदेश कांग्रेस ने सरकार के डिजिटल गुजरात के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा कि गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसईबी) की मार्कशीट दशकों पुराने फॉर्मेट में दी जा रही है, जबकि देश के अन्य राज्यों और केंद्रीय बोर्ड ने आधुनिक तकनीक अपना ली है।गुजरात प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता हेमांग रावल ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि गुजरात बोर्ड की मार्कशीट में फोटो, जन्मतिथि, माता का नाम और क्यूआर कोड जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं ठीक से नहीं हैं। इससे छात्रों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। फर्जी मार्कशीट और दस्तावेज़ धोखाधड़ी की संभावना बढ़ रही है। विदेश में पढ़ाई या नौकरी के लिए वैरिफिकेशन में देरी होती है। डिजिटल सुविधा के अभाव में छात्रों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने मांग की कि इस वर्ष जारी होने वाली कक्षा 10 और 12 वीं की मार्कशीट में क्यू आर कोड और ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू की जाए। उन्होंने बताया कि कर्नाटक बोर्ड ब्लॉकचेन सिस्टम से डेटा को सुरक्षित बना रहा है। महाराष्ट्र बोर्ड ने डिजिटल सिग्नेचर और क्यूआर कोड लागू कर दिया है, वहीं सीबीएसई और एनआइओएस डिजिटल लॉकर इंटीग्रेशन से वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त की है।
Published on:
29 Mar 2026 10:41 pm
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