गांधीनगर. बनासकांठा जिले के प्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर में मोहनथाल का प्रसाद बंद करने का चहुंओर विरोध हो रहा है। शुक्रवार को यह मुद्दा गुजरात विधानसभा में भी गूंजा। कांग्रेस विधायकों ने अंबाजी में प्रसाद के मुद्दे पर चर्चा करने की सदन में मांग की, लेकिन इस मुद्दे पर चर्चा से इनकार करने के बाद विधायकों ने पोस्टर लहराए और नारेबाजी की। बाद में कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। उधर, सत्ता पक्ष के प्रस्ताव के बाद कांग्रेस के सभी विधायकों को सदन से एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया।
इससे पहले, विधानसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के बाद दोपहर के दौरान कांग्रेस विधायक मोहनथाल का प्रसाद लेकर पहुंचे थे। विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने प्रश्नकाल की शुरुआत में ही सदन का ध्यान आकर्षित करते कहा कि ऐसा ध्यान में आया कि कुछ लोग खाने की वस्तु लेकर सदन में पहुंचे हैं। सदन की गरिमा के तहत यह ठीक नहीं है। इस दौरान कांग्रेस के विधायक दल के नेता अमित चावड़ा ने प्वाइन्ट ऑफ ऑर्डर उठाते हुए अंबाजी के प्रसाद के मुद्दे पर चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने फिलहाल इस मुद्दे पर चर्चा कराने से इनकार कर दिया। बाद में कांग्रेस विधायक हाथों में पोस्टर लहराते हुए नारेबाजी करने लगे और सदन से बाहर निकल आए।स्थानीय विधायक ने की थी चर्चा की मांग
वॉकआउट करने के बाद कांग्रेस विधायक चावड़ा ने मीडिया से कहा कि दांता क्षेत्र (अंबाजी इसी विधानसभा सीट के तहत है) के विधायक कांति खराडी ने सदन में मोहनथाल के प्रसाद के मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी। इसके लिए नियम के मुताबिक नोटिस भी दी गई थी। कई बार अनुरोध भी किया गया, लेकिन चर्चा की मंजूरी नहीं दी गई।हिन्दुओं की भावना को ठेस पहुंचा रही सरकार
विधायक दल के नेता चावड़ा ने भाजपा सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि जनभावना से जुड़े मुद्दे पर बात करने से रोका गया। बाद में सभी को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हिन्दुत्व और आस्था के नाम पर सत्ता हासिल करने वाले हिन्दुओं की भावना को ठेस पहुंचा रही है। अभी अंबाजी में प्रसाद बदला गया, बाद में सोमनाथ, द्वारका, डाकोर का प्रसाद भी बदला जा सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस विधायकों का शिष्टमंडल गांधीनगर में यात्राधाम विकास बोर्ड के सचिव से भी मिला था। इस शिष्टमंडल ने अंबाजी मंदिर में मोहनथाल का प्रसाद ही वितरित करने की अनुरोध किया था।
उल्लेखनीय है कि मंदिर प्रशासन ने कुछ दिनों पहले परंपरागत मोहन थाल के प्रसाद को बंद कर चिक्की का प्रसाद देना आरंभ किया है। इसे लेकर श्रद्धालुओं में विरोध है।