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संविधान एक किताब नहीं बल्कि राष्ट्रहित में सर्वोपरि: सीएम

संविधान दिवस मनाया, गांधीनगर में सीएम, मंत्री सहित अधिकारियों ने पढ़ा प्रस्तावना का पाठ

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CM bhupendra patel and other

संविधान दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने आह्वान किया कि संविधान को महज एक किताब के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्रहित के सर्वोपरि के भाव से जीवन शैली में जोड़ना चाहिए। गांधीनगर में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि संविधान के मूल्यों को बढ़ावा देने की देश भक्ति की भावना से वर्ष 2015 से पूरे देश में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष संविधान के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, ऐसे में पूरे देश में इस दिन को हमारा संविधान, हमारा गौरव थीम के साथ मनाया जा रहा है। सीएम पटेल की अध्यक्षता में इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री, विधायकों, पदाधिकारियों, मुख्य सचिव समेत अधिकारी और पदाधिकारियों ने संविधान की प्रस्तावना का पाठ भी पढ़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीयता हमारा धर्म है, इसलिए संविधान न केवल हमारा धर्मग्रंथ है, बल्कि यह संविधान हम सभी को अपने नागरिक धर्म का पालन करने का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने संविधान को एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना का भी प्रतीक बताया। साथ ही 'वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को भी संविधान की विशेषता बताया।इस कार्यक्रम में बाबा साहेब अंबेडकर के अमूल्य योगदान के साथ-साथ सरदार वल्लभभाई पटेल, कन्हैयालाल मुंशी जैसे गुजरात के लोगों के योगदान को भी याद किया गया। उन्होंने 'वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को भी संविधान की विशेषता बताया।