
डॉ. महावीर गोलेच्छा
अहमदाबाद. भारत सरकार एवं राज्य सरकारों की बंद पड़ी या कम क्षमता के साथ चल रही फार्मा कंपनियों में कोरोना की दवा उत्पादन शुरू कराया जाना चाहिए। स्वास्थ्य प्रणाली व एवं स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ डॉ. महावीर गोलेच्छा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजा है।
इस पत्र में डॉ गोलेच्छा ने बताया है कि कई सरकारी फार्मास्यूटिकल कम्पनियां या तो बंद पड़ी हैं या बहुत कम क्षमता के साथ चल रही हैं। सरकारी क्षेत्र की फार्मा कंपनियों में कोरोना के इलाज में काम आने वाली रेमडिसिविर, टोसिलिजुमैब, एनोक्सापारिन आदि दवाओं का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है। इससे सरकारी अस्पतालों एवं जनता को उचित एवं सस्ती दरों में दवाएं मिल सकेंगी।
इसके अलावा आई आई टी और जन स्वास्थ्य संस्थानों एवं अन्य तकनीकी संस्थानों को शोध एवं कम दरों के ऑक्सीजन कन्सेंट्रेटर्स, टेस्टिंग तकनीकों को विकसित करने, ई-हेल्थ प्लेटफार्म विकसित करने के धनराशि प्रदान करवाई जानी चाहिए। इन संस्थानों की शोध क्षमता का उपयोग कोरोना आपदा के प्रबंधन के लिए विभिन्न तकनीक विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
भारत सरकार के मातहत कंपनियों और कई केमिकल इंडस्ट्रीज की ओर से ऑक्सीजन का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा सकता है। देश में 500 से ज्यादा शुगर उद्योगों का उपयोग भी ऑक्सीजन के उत्पादन में किया जा सकता है।
पुणे में स्थित सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की क्षमता है, इस कंपनी की ओर से बड़़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन किया जा सकता है। बाजार में कई दवाओं की कालाबाजारी भी हो रही है। सरकार को इनके उपयोग पर निगरानी करनी चाहिए और इनकी उपलब्धता बढ़ानी चाहिए। मानवीय त्रासदी के समय जीवन रक्षक दवाएं या अन्य सामग्री बनाने की इच्छुक कंपनियों को तुरंत लाइसेंस देना चाहिए।
धर्मशाला, छात्रावासों का उपयोग कोविड उपचार केन्द्र के रूप में हो
उन्होंने लिखा है कि लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों के प्रबंधन में सारे सरकारी एवं निजी अस्पतालों में बेड कम पड़ रहे हैं। इस स्थिति में देश में जगह-जगह पर उपलब्ध सामाजिक भवनों, धर्मशाला, छात्रावासों का उपयोग कोविड उपचार केन्द्र के रूप में किया जा सकता है। इन संस्थानों में बेड, भोजन तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, सरकार को स्वास्थ्यकर्मी तथा ऑक्सीजन, मेडिसिन एवं अन्य सामग्री की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इन संस्थानों में कोरोना के माइल्ड लक्षण वाले मरीजों का उपचार किया जा सकता है।
Published on:
05 May 2021 10:32 pm
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