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सीयूजी में बढ़ा चीनी और जर्मन भाषा सीखने का क्रेज

जर्मन सीखने को एक सीट पर 55 तो चीनी भाषा के लिए एक सीट पर 50 दावेदार, बीते साल से दो गुने आवेदन, वाइब्रेंट गुजरात के चलते आई कई कंपनियां, जानकारों की मांग बढ़ी

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सीयूजी में बढ़ा चीनी और जर्मन भाषा सीखने का क्रेज

नगेन्द्र सिंह

अहमदाबाद. गुजरात की राजधानी गांधीनगर में स्थित गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजी) से जर्मन और चीनी भाषा सीखने वालों का क्रेज बढ़ रहा है।
इसका अंदाजा इस बाद से लगाया जा सकता है कि जर्मन भाषा से स्नातक (बीए ऑनर्स) करने के लिए एक सीट पर 55 विद्यार्थियों ने इस साल दावेदारी की है, जबकि चीनी भाषा से बीए ऑनर्स करने के लिए एक सीट पर 50 दावेदार हैं। देशभर से इस साल इन दोनों भाषाओं के लिए अब तक के रिकॉर्ड आवेदन आए हैं। यह संख्या बीते वर्ष २०१८-२०१९ की तुलना में दो गुने से भी ज्यादा हैं।
जून-२०१९ से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र के लिए बीए इन जर्मन स्टडी ऑनर्स प्रोग्राम में उपलब्ध 33 सीटों के लिए १८२७ आवेदन आए हैं। जबकि बीए इन चाइनीज स्टडी ऑनर्स प्रोग्राम की 33 सीटों के लिए १६७१ विद्यार्थियों ने आवेदन किए हैं। बीते साल इन दोनों कोर्स में ३०-३० सीटें थीं। इस साल ईडब्ल्यूएस आरक्षण के चलते 10 फीसदी सीटें बढ़ाई हैं। बीते साल दोनों में ६०० से ७०० विद्यार्थियों ने आवेदन किया था।
दोनों ही भाषाओं से स्नातक करने की मांग बढऩे की प्रमुख वजह वर्ष २००३ से गुजरात की सरजमीं पर हो रही वाइब्रेट गुजरात वैश्विक निवेशक सम्मेलन और उसके तहत लगने वाली प्लास्ट इंडिया प्रदर्शनी है, जिसके चलते गुजरात और देश में निवेश करने वाली चीनी और जर्मनी की कंपनियों की संख्या बढ़ी है। जिस कारण दोनों ही भाषाओं के जानकारों की मांग भी बढ़ी है। सीयूजी से इन दोनों ही भाषाओं में बीए की डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को न सिर्फ बेहतर रोजगार (नौकरी) मिला है, बल्कि जो आगे पढऩा चाहते हैं उन्हें उच्च अभ्यास के मौके भी मिले हैं। कुछ तो चीन में जाकर भी पढ़ाई कर रहे हैं। भारत सरकार और चीन सरकार भी छात्रवृत्ति दे रही है। छात्रों की संख्या के लिहाज से सीयूजी यह पश्चिम भारत का सबसे बड़ा चीनी और जर्मन भाषा से बीए की शिक्षा देने वाला केन्द्र है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीयू-सेट) २०१९ के जरिए इस साल पहली बार सीयूजी के जर्मन और चीनी भाषा में बीए में प्रवेश दिया जा रहा है। जिससे भी देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन मिले हैं।

एनआईटी छोड़ सीखी चीनी भाषा, अब चीन में पीएचडी
मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले मनोहर कुमार ने एनआईटी जमशेदपुर में बीटेक में मिले प्रवेश को ठुकराकर चीनी भाषा सीखनी शुरू की। सीयूजी से चीनी भाषा में एमए किया है। एक साल चीन भी पढ़कर आए हैं और अब स्कॉलरशिप पर चीन के बीजिंग विश्वविद्यालय से चीनी भाषा में पीएचडी करेंगे। मनोहर कहते हैं कि चीनी भाषा में बेहतर अवसर हैं। देश में बहुत कम जगह सिखाई जाती है। सीयूजी में प्रवेश लिया। मार्गदर्शन अच्छा मिला। चीन गए तो चीन की प्रगति को और भी जानने की ललक जगी सो अब पीएचडी भी करेंगे। सीयूजी में भाषा के साथ उस देख की संस्कृति, रहन-सहन, खानपान, व्यापार, राजनीति को भी सिखाया जाता है।
-मनोहर कुमार, एमए के छात्र अब चीन से करेंगे पीएचडी

क्योंकि नौकरी, उच्च शिक्षा की अपार संभावनाएं
वाइब्रेंट गुजरात, प्लास्ट इंडिया और फिर मेक इन इंडिया की पहल के चलते गुजरात ही नहीं देशभर में चीनी भाषा के जानकारों की मांग बढ़ी है। क्योंकि बड़े पैमाने पर इन देशों की कंपनियां भारत व गुजरात में निवेश कर रही हैं। जिससे चीनी भाषा में बीए करने वाले विद्यार्थियों एवं इस भाषा के जानकारों के लिए नौकरी की अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। उनके लिए उच्च शिक्षा के भी बेहतर अवसर हैं। सीयूजी में २०12 से चीनी भाषा में बीए की शुरूआत हुई। बीते दो-तीन सालों से क्रेज काफी बढ़ा है। हर साल कई विद्यार्थी पढऩे के लिए चीन के विश्वविद्यालयों में भी जाते हैं। कोर्स करते ही अच्छे पैकेज पर नौकरी भी मिल जाती है।
-प्रशांत कौशिक, सहायक प्रोफेसर, चीनी भाषा अध्ययन केन्द्र,सीयूजी

जर्मन सीखने के बाद तत्काल जॉब
सीयूजी से जर्मन भाषा सीखने के बाद कोई भी विद्यार्थी घर नहीं बैठा है। उसे तत्काल जॉब मिल जाती है। सालाना आठ से नौ लाख का पैकेज मिलता है। 100 प्रतिशत प्लेसमेंट है। उच्च शिक्षा के लिए जर्मनी के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के भी अवसर हैं। इस वजह से मांग बढ़ी है। वाइब्रेंट गुजरात, प्लास्ट इंडिया, मेक इन इंडिया के चलते जर्मन भाषा के जानकारों की मांग बढ़ी है। क्रेज का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि विद्यार्थी आईआईटी में मिले प्रवेश को छोड़कर विद्यार्थी जर्मन सीखने आ रहे हैं।
-रोशनलाल जाहेल, सहायक प्रोफेसर, जर्मन अध्ययनकेन्द्र, सीयूजी