
अहमदाबाद शहर क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आरोपी।
Ahmedabad. शहर साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने अत्याधुनिक और चौंकाने वाली पद्धति से ठगी करने वाली अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश किया है। उत्तरप्रदेश और असम में दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) की मदद से तैयार किए गए वीडियो का इस्तेमाल कर लोगों के आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर बदल देता था और फिर संबंधित व्यक्ति के दस्तावेजों से छेड़छाड़ करते। फिर उसका उपयोग करके उन्हीं के नाम पर बैंक लोन लेकर लाखों की चपत लगाते थे।
पकड़े गए आरोपियों में कृष्णा प्रजापति (22) उत्तरप्रदेश के कुशीनगर जिले के नौका टोला गांव और काजीमुद्दीन अली (49) असम के मोरीगांव जिले के बोवालगुरी का रहने वाला है। रब्बुल हुसैन भी बोवालगुरी का निवासी है। असम के दोनों आरोपी मुख्य सूत्रधार हैं। कृष्णा साइबर कैफे चलाता था। उसने आधार कार्ड में मोबाइल नंबर बदलवा था। इसके लिए एक से 1500 रुपए लेता था।
साइबर क्राइम ब्रांच उपायुक्त (डीसीपी) डॉ.लवीना सिन्हा ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि गिरोह के सदस्य विभिन्न वेबसाइटों के माध्यम से लोगों के आधारकार्ड की जानकारी जुटाते थे। किसी के नाम से जीएसटी नंबर तलाशते, उसके जरिए पैन कार्ड की जानकारी प्राप्त करते थे। इसके आधार पर पर वे पीड़ित का सिबिल स्कोर और फिर रजिस्टर मोबाइल नंबर की जानकारी प्राप्त कर लेते। फिर मोबाइल नंबर से टेलीग्राम चैटबॉट की मदद से मोबाइल नंबर से आधार कार्ड की बाकी जानकारी पा लेते थे। फिर ये सोशल मीडिया से उस व्यक्ति का फोटो हासिल करते थे।
शातिर आरोपी एआइ तकनीक से पीड़ित का वीडियो बनाकर आधार में दर्ज फेस-रिकग्निशन ऑथेंटिकेशन करके आधार में दर्ज मोबाइल नंबर बदल देते थे। नया नंबर लिंक होने पर उसी नाम से बैंक खाते खोलकर ऑनलाइन लोन ले लेते थे। उसकी रकम काजीमुद्दीन के खाते में ट्रांसफर करवा लेते थे। पुलिस ने बताया कि इस गैंग ने कितने लोगों के नाम पर कितनों का लोन लिया है। इनके साथ और कितने लोग इसमें शामिल हैं, इसकी गहन जांच जारी है।
डॉ.लवीना ने बताया कि ज्यादा जांच ना हो इसके लिए यह 25 से 50 हजार रुपए की ही ऑनलाइन लोन लेते थे। इस मामले में कई और आरोपी भी लिप्त हैं। इसमें पहले चार आरोपियों को पकड़ा गया था। अब तक सात आरोपियों को पकड़ा जा चुका है।
उपायुक्त ने बताया कि उनके पास एक शिकायतकर्ता आया कि उन्हें अब ओटीपी नहीं आ रही हैं। शंका है फोन हैकहुआ है। जांच में पता चला कि आधार कार्ड में आणंद से उनका रजिस्टर मोबाइल नंबर चेंज किया। फिर आधारकार्ड में बायोमैट्रिक चेंज कर दी। फिर एआइ की मदद से ब्लिंकिंग वीडियो बनाया उससे डीजी लॉकर हैक किया और तीन बैंक अकाउंट खुलवाया और उसमें से 25 हजार रुपए की लोन ली थी। उपायुक्त सिन्हा ने बताया कि ऐसी नई मोडस ऑपरेंडी के जरिए ठगी करने की जानकारी देश की अन्य सुरक्षा एजेंसियों, आधार अथॉरिटी को दी है।
Published on:
08 May 2026 10:37 pm
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