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डिजिटल युग में डेटा नीति निर्माण की नींव: अन्नपूर्णा देवी

आइआइएम-ए में एसडीजी-5 लैंगिक समानता पर राष्ट्रीय कार्यशाला, राज्य, केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों की रिपोर्ट जारी की गई, जिनमें 792 जिलों के आंकड़ों के आधार पर 26 प्रमुख लैंगिक समानता संकेतकों का विश्लेषण किया गया

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आइआइएमए में हुई कार्यशाला के दौरान रिपोर्ट जारी करते अतिथि।

Ahmedabad. केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि आज के डिजिटल युग में डेटा नीति निर्माण की नींव है। तकनीक और एआइ आधारित निगरानी से योजनाओं का असर और सटीक हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को “महिला-नेतृत्व वाले विकास” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने वाला बताया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए सहयोग का दृष्टिकोण समय की मांग है।

उन्होंने यह बात भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (आइआइएम-ए) में नीति आयोग, गेट्स फाउंडेशन और गुजरात सरकार के सहयोग से सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 5 लैंगिक समानता पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर राज्य, केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों की रिपोर्ट जारी की गई, जिनमें 792 जिलों के आंकड़ों के आधार पर 26 प्रमुख लैंगिक समानता संकेतकों का विश्लेषण किया गया है।

इस अवसर पर गुजरात की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा वकील, नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास, संयुक्त राष्ट्र भारत प्रतिनिधि स्टेफन प्रीस्नर, आइआइएमए निदेशक प्रो. भरत भास्कर और प्रो. विद्या वेमिरेड्डी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

रिपोर्ट को लेकर डॉ. मनीषा वकील ने कहा कि यह अध्ययन विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा। लैंगिक मानता केवल सामाजिक विकास का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह न्या, समानता और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा विषय है। महिलाओं को विकास प्रक्रिया के केन्द्र में रखकर ही विकसित भारत का संकल्प साकार किया जा सकता है।

आइआइएम-ए के निदेशक प्रो. भरत भास्कर ने कहा कि संस्थान ने हमेशा से देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण सभी सेक्टर के विकास को बढ़ावा दिया है। महिला सशक्तीकरण देश के विकास के लिए अहम है। इसमें संस्थान भी योगदान दे रहा है।

तीन पैनल चर्चाएं

कार्यशाला में तीन पैनल चर्चाएं हुईं। पहली चर्चा डेटा से निर्णय तक पर केंद्रित रही, दूसरी में महिला आर्थिक सशक्तिकरण पर विचार हुआ और तीसरी चर्चा महिला सामाजिक सशक्तिकरण पर केंद्रित रही। चर्चा हुई कि जिला स्तर पर सटीक और डेटा-आधारित रणनीतियां ही लैंगिक समानता और महिला-नेतृत्व वाले विकास को गति दे सकती हैं। रिपोर्ट और चर्चाएं मिलकर नीति निर्माण को और मजबूत बनाएंगी तथा स्थानीय स्तर पर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त करेंगी।