
विदेशी लोगों के डेबिट-क्रेडिट कार्ड से लाखों की खरीदी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पाकिस्तानियों से संपर्क का भी खुलासा
अहमदाबाद. विदेशी लोगों के डेबिटकार्ड-क्रेडिट कार्ड के चोरी किए गए डाटा का उपयोग कर ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट से लाखों रुपए की खरीदी कर चपत लगाने वाले शातिर ठग गिरोह का क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। गिरोह में शामिल तीन आरोपियों को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से 12 मोबाइल फोन, पांच लैपटॉप और २४९ सिमकार्ड व एक डोंगल जब्त किया है। आरोपियों के पाकिस्तानी लोगों से भी संपर्क का खुलासा हुआ है।
पकड़े गए आरोपियों में हर्षवर्धन परमार, कल्पेश कुमार सिंघा और मोहित लालवानी (सूरत) शामिल हैं।
क्राइम ब्रांच के अनुसार हर्षवर्धन अब तक ७० लाख, कल्पेशकुमार सिंघा ७० लाख और मोहित ६० लाख रुपए की खरीदी इस प्रकार से कर चुके हैं।
आरोपी डार्क वेबसाइट के जरिए अमरीका, कनाडा व अन्य देश के लोगों के नाम, क्रेडिट-डेबिटकार्ड का नंबर, सीवीवी नंबर, उसका एक्सपायरी नंबर, डेट ऑफ बर्थ वगेरह की जानकारी ऑनलाइन चोरी करते एवं खरीदते थे।
उसके जरिए ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों से सोने के सिक्के, मोबाइल फोन, इलैक्ट्रिोनिक वस्तुएं एवं कपड़े खरीदते थे। इसके लिए खुद का फर्जी नाम और अधूरा पता(जिसमें नारोल सर्कल व अन्य सर्कल) देते और वहीं पर डिलिवरी लेते थे। इसके लिए अलग अलग नाम के सिमकार्डों का उपयोग करते थे।
माल पाकर उसे अन्य जगह पर बेचकर पैसे जुटा लेते थे। आरोपी बीते कई सालों से इस प्रकार से ही ठगी कर रहे हैं।
इनके पास से मिले मोबाइल फोन, लैपटॉप में कई डार्क वेबसाइट का ब्यौरा मिला है। कनाडा व अमरीका के नागरिकों के डेबिट-क्रेडिट कार्ड व अन्य ब्यौरा मिला है।
पाकिस्तानी लोगों से पाई डार्क वेबसाइट की लिंक
प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपी हर्षवर्धन की सोशल मीडिया प्लेटफार्म (टेलीग्राम) के जरिए पाकिस्तान के करांची में रहने वाले जिया मुस्तुफा तथा सादाम एचबी के साथ मुलाकात हुई थी। इन्हीं के पास से उसने विदेशी लोगों के क्रेडिट, डेबिट कार्ड की डिटेल खरीदने के लिए लिंक एवं उसका आईडी-पासवर्ड टेलीग्राम के जरिए ही प्राप्त किया था। उसके एवज में राशि को बिटकॉइन खाते में जमा कराए थे। हर्षवर्धन ने पाकिस्तानी लोगों से पाई लिंक एवं जानकारी को उसके दो अन्य साथी कल्पेश और मोहित को भी दिया था।
२०१४ से कर रहे ठगी, कोलकाता सीखने भी गया
प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपी हर्षवर्धन मोहित वर्ष २०१४ से इस प्रकार से साइबर ठगी कर रहे हैं। हर्षवर्धन विदेशी कार्ड स्वेपिंग में कुछ नया सीखने के लिए कोलकाता भी गया था।
Published on:
13 Mar 2021 10:58 pm
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