
शुरुआत में मोटर गैरेज में रहते थे श्वेत क्रांति के जनक डॉ. कुरियन
बुरहान पठाण
आणंद. अमूल दूध पिता है इंडिया... के नारे के साथ अमूल ब्रांड पूरे देश में घरों में लोकप्रिय है। जब डेयरी उत्पादों की बात आती है तो अमूल ब्रांड हमेशा पहला ब्रांड होता है जो दिमाग में आता है। आणंद शहर में 1949 में जब कोई भी डॉ. वर्गीज कुरियन को मकान किराए पर नहीं देता था तब वे एक मोटर गैरेज में रहते थे। शादी के बाद पत्नी मौली कुरियन के साथ उन्होंने गैराज में लंबा समय बिताया। आज यह गैराज स्मारक के रूप में है।
देश की श्वेत क्रांति के जनक माने जाने वाले कुरियन के जन्म दिन 26 नवंबर को राष्ट्रीय दूध दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष अमूल ने अमूल क्लीन ईंधन रैली का आयोजन किया है।एक समय था जब हमारा देश दूध की कमी से जूझ रहा था। वर्ष 1921 में केरल के कोजीकोड में जन्मे कुरियन ने 1940 में चेन्नई के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की। फिर उन्हें डेयरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए भारत सरकार से छात्रवृत्ति मिली। 1948 में उन्होंने डेयरी इंजीनियरिंग में डिग्री के साथ अमरीका की मिशिगन विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की।
उन्होंने 14 दिसंबर 1946 को खेड़ा डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड की स्थापना की, जिसके संस्थापक अध्यक्ष त्रिभोवनदास पटेल थे। यूनियन का नाम लंबा था इसलिए एक बैठक में कुछ कर्मचारियों ने अमूल नाम सुझाया और बाद में इस सहकारी संस्था का नाम अमूल रखा गया।डॉ. कुरियन को ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम के लिए भी जाना जाता है जिसकी शुरुआत 1970 में हुई। इस कार्यक्रम के मार्फत 700 से अधिक शहरों और कस्बों के दूध उत्पादकों को नेशनल मिल्क ग्रिड से जोड़ा गया और इस तरह देश में दूध की कमी दूर हुई।
अमूल की सफलता को देखने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इस मॉडल को अन्य स्थानों पर ले जाने का फैसला किया। इसके बाद राष्ट्रीय दूध विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का गठन किया गया जिसका अध्यक्ष कुरियन को बनाया गया।भारत के मिल्क मैन के रूप में जाने वाले कुरियन को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। 9 सितंबर 2012 को 90 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
जब अमूल परिसर में उनका नया क्वार्टर तैयार किया जा रहा था, तब वह भी क्वार्टर में चले गए और जिस क्वार्टर में वह रहते थे उसे एक संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है। उनकी तस्वीरें, कुर्सी-मेज, अलमारी सहित अन्य को संरक्षित किया गया है।
Published on:
25 Nov 2023 10:36 pm
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